अमेरिका की थीम पर सोल की युद्धकालीन सैन्य नियंत्रण सौंपने की प्रक्रिया में बदलाव की चेतावनी
अमेरिका की थीम पर सोल की युद्धकालीन सैन्य नियंत्रण सौंपने की प्रक्रिया में बदलाव की चेतावनी
NewsPoint•
दक्षिण कोरिया ने अमेरिका से अपने युद्धकालीन सैन्य नियंत्रण (ओपकॉन) को जल्दी सौंपने की मांग की है। यह बात अप्रैल में राष्ट्रपति ली जे म्युंग के द्वारा कही गई थी। अमेरिका ने कहा है कि दोनों देशों के बीच समर्पण की शर्तें पहले जैसी ही हैं, लेकिन उन्होंने चेतावनी दी है कि कोरियाई प्रायद्वीप में सुरक्षा खतरे तेजी से बदल रहे हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि दक्षिण कोरिया का यह अधिग्रहण तब होगा जब आवश्यक शर्तें पूरी होंगी।
अमेरिका और दक्षिण कोरिया का गठबंधन बहुत ही महत्वपूर्ण है। हाल ही में, अमेरिका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "युद्धकालीन सैन्य अभियान नियंत्रण के हस्तांतरण की बुनियादी शर्तें पहले जैसी ही हैं, लेकिन क्षेत्र में खतरे का माहौल तेजी से बदल रहा है।" यह चिंता खासकर उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रमों और नई मिसाइल परीक्षणों को लेकर जताई जा रही है। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने सोमवार को कहा, "युद्धकालीन सैन्य अभियान नियंत्रण जल्द दक्षिण कोरिया को वापस मिलना चाहिए। सोल क्षमतावान है और इस दिशा में अमेरिका के साथ बातचीत भी आगे बढ़ रही है।" राष्ट्रपति का ये बयान इस बात का संकेत है कि दक्षिण कोरिया अपने सैन्य नियंत्रण को लौटने की कोशिश में है। उनका लक्ष्य है कि 2030 में उनके राष्ट्रपति पद का कार्यकाल खत्म होने से पहले यह प्रक्रिया पूरी हो जाए।
हालांकि, दोनों देशों के बीच हस्तांतरण की समयसीमा और मानकों को लेकर मतभेद उभरते दिख रहे हैं। अमेरिकी सेना की दक्षिण कोरिया में तैनात कमान के प्रमुख जनरल जेवियर ब्रनसन ने हाल ही में कहा था कि हालात बदल गए हैं। उन्होंने संकेत दिया कि सैन्य कमान के हस्तांतरण के लिए नए मानकों की आवश्यकता हो सकती है। इससे दक्षिण कोरिया में चिंता बढ़ी है।
दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्रालय की प्रवक्ता चुंग बिन-ना ने कहा, “यदि हस्तांतरण की शर्तें लगातार बदलती रहेंगी, तो इस लक्ष्य को हासिल करना कभी संभव नहीं हो पाएगा।” उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों देश पहले से तय शर्तों के आधार पर इस मुद्दे पर समन्वय बनाए हैं। यह साबित करता है कि स्थिति जटिल हो गई है।
कोरियाई युद्ध (1950-1953) के दौर में दक्षिण कोरिया ने युद्धकालीन नियंत्रण अमेरिका के नेतृत्व वाली संयुक्त राष्ट्र कमान को सौंप दिया था। बाद में, 1978 में इसे अमेरिका और दक्षिण कोरिया की संयुक्त सेनाओं की कमान के अधीन कर दिया गया। दक्षिण कोरिया ने 1994 में शांतिकालीन सैन्य अभियान नियंत्रण वापस हासिल कर लिया था, लेकिन युद्धकालीन नियंत्रण अब भी अमेरिका की दक्षिण कोरिया में तैनात कमान के पास है।
दोनों देश अब इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि दक्षिण कोरिया को युद्धकालीन सैन्य नियंत्रण कब और किस शर्त पर सौंपा जाएगा। ऐसे में स्थिति हर दिन बदल रही है और खतरे भी बढ़ रहे हैं। अमेरिका ने इस प्रक्रिया के अंतिम फैसले को लेकर स्पष्ट नहीं किया है। वे यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि सभी आवश्यक शर्तें पूरी हों, ताकि दक्षिण कोरिया को संघर्ष के समय में सही तरीके से संभाला जा सके।
इसलिए, अमेरिका की यह नीति है कि किसी भी तरह के हस्तांतरण से पहले सभी सुरक्षा उपायों पर ध्यान दिया जाए। यह त्रुटि से बचने का एक प्रयास है, ताकि सुरक्षा खतरों का सामना करने के लिए दोनों देशों की सेनाएं सही तरीके से तैयार रहें। दोनों देशों के बीच का यह संधि और बातचीत का सिलसिला भविष्य में स्थिति को भलीभांति संभालने के लिए जरूरी है।