इसरो ने जीएसएलवी एफ18 से एनवीएस 03 सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित किया, गगनयान के आगामी लॉन्च की जानकारी भी दी
इसरो ने जीएसएलवी-एफ18 से एनवीएस-03 सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित किया, गगनयान के आगामी लॉन्च की जानकारी भी दी
NewsPoint•
श्रीहरिकोटा, 31 अक्टूबर: इसरो ने एक बार फिर से अपनी ताकतवर तकनीक का प्रदर्शन किया। जीएसएलवी-एफ18 ने एनवीएस-03 को सफलतापूर्वक उसकी निर्धारित कक्षा में स्थापित कर दिया है। इस मिशन की सफलता पर इसरो के प्रमुख वी. नारायणन ने प्रसन्नता जताते हुए कहा कि नेविगेशन सैटेलाइट एनवीएस-03 को सटीकता के साथ कक्षा में पहुंचा दिया गया है। इस सफलता के साथ भारत ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है और अब देश के पास चार नेविगेशन सैटेलाइट हो गए हैं।
इसरो प्रमुख वी. नारायणन ने कहा, “बेहतर पीएनटी (पोजीशनिंग, नेविगेशन और टाइमिंग) सेवाओं के लिए कम से कम चार उपग्रहों की जरूरत होती है और आज के लॉन्च के साथ हमारे पास कक्षा में चार उपग्रह हो जाएंगे।” यह बहुत अच्छी बात है, लेकिन उन्होंने यह भी बताया कि सटीक पोजीशनिंग और निरंतर सेवा के लिए कुल सात उपग्रहों की आवश्यकता है। वर्तमान में, दो और उपग्रह तैयार होने के अंतिम चरण में हैं और एक उपग्रह को मंजूरी मिलने की प्रक्रिया चल रही है। जब ये सब हो जाएगा, तो भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा जिनके पास अपना खुद का नेविगेशन सैटेलाइट कॉन्स्टेलेशन है।इस दौरान, नारायणन ने आगामी मिशनों के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष में इसरो का लक्ष्य पांच और लॉन्च करना है। इनमें बिना क्रू वाला ‘गगनयान जी’ मिशन भी शामिल है। इसके अलावा, इसरो दो पीएसएलवी और दो स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (एसएसएलवी) को भी लॉन्च करने का योजना बना रहा है। उन्होंने कहा, “हम एक प्राइवेट लॉन्च की भी योजना बना रहे हैं। कुल मिलाकर हम 6 लॉन्च के बारे में सोच रहे हैं, लेकिन कम से कम 5 लॉन्च पूरे करने की हमारी योजना है।”
‘गगनयान’ एक बहुत ही महत्वपूर्ण मिशन है। इसका उद्देश्य अपने खुद के लॉन्च व्हीकल का उपयोग करके अंतरिक्ष यात्रियों (गगन यात्रियों) को अंतरिक्ष में भेजना है। नारायणन ने बताया कि अब तक इस मिशन के लिए 8,000 से अधिक परीक्षण पूरे किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा, “वास्तविक मानव को अंतरिक्ष में भेजने से पहले, हमें तीन ऐसे मिशन पूरे करने हैं जिनमें कोई इंसान नहीं होगा।”
वी. नारायणन ने आगे यह भी बताया कि हमारे गगन यात्रियों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। इसी कारण, सभी पहले ‘अनक्रूद मिशन’ पर काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि एलपीएस के डायरेक्टर ने कई सिस्टम तैयार किए हैं और URC के डायरेक्टर की अगुवाई में कई सिमुलेशन टेस्ट चल रहे हैं। आईपीआरसी और BSSE की टीमों ने पूरा लॉन्च व्हीकल तैयार किया है और वे सर्विस मॉड्यूल तथा क्रू मॉड्यूल से जुड़े सॉफ्टवेयर बनाने में भी योगदान दे रहे हैं।
नारायणन ने कहा कि सारे काम बहुत अच्छी तरह से चल रहे हैं और भारत के प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में हमें पूरा विश्वास है कि हम जल्द ही इसे सफलतापूर्वक पूरा कर लेंगे। यह भारत के लिए एक नई उपलब्धि है और देश के वैज्ञानिकों ने एक बार फिर से साबित कर दिया है कि वे किसी भी चुनौती को स्वीकार करने में सक्षम हैं। ऐसी खबरें हमें गर्व महसूस कराती हैं और आगे के मिशनों की लॉन्चिंग का इंतजार रहेगा।