Indonesian Rupiah Hits Record Low Double Blow From Middle East Crisis And Declining Foreign Investment
इंडोनेशियाई रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर, मध्य पूर्व संकट और विदेशी निवेश में गिरावट का असर
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ईरान के कड़े रुख से एशियाई बाजारों में हड़कंप मच गया है। इंडोनेशियाई रुपया डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया है। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और तेल की कीमतों में उछाल ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। विदेशी निवेशक इंडोनेशिया से पैसा निकाल रहे हैं। यह स्थिति वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए चिंताजनक है।
ईरान द्वारा युद्धविराम की मांग को ठुकराने और होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद रखने के फैसले के बाद मंगलवार को एशियाई बाजारों में गिरावट देखी गई। इंडोनेशियाई रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया, जबकि मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और तेल की कीमतों में उछाल ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी।
ईरान के रुख से एशियाई बाजारों में घबराहट, रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर परमंगलवार को एशियाई बाजारों में भारी गिरावट देखी गई, जिसका मुख्य कारण ईरान द्वारा युद्धविराम की मांग को ठुकराना और होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद रखने का उसका फैसला रहा। इस घटनाक्रम ने निवेशकों के बीच घबराहट पैदा कर दी, जिससे इंडोनेशियाई रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और तेल की कीमतों में लगातार उछाल ने एशियाई अर्थव्यवस्थाओं, विशेषकर तेल आयातकों को बुरी तरह प्रभावित किया है। इसके अलावा, इंडोनेशिया में वित्तीय अनुशासन, केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता और शेयर बाजार के नियमों को लेकर चिंताएं भी विदेशी निवेशकों को दूर भगा रही हैं।
ईरान का इनकार और होर्मुज जलडमरूमध्य का बंद रहना: बाजार पर गहरा असर
ईरान ने युद्धविराम की किसी भी अस्थायी व्यवस्था को सिरे से खारिज कर दिया है। साथ ही, उसने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने से भी इनकार कर दिया है। यह जलडमरूमध्य वैश्विक तेल व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है। ईरान के इस रुख ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मंगलवार रात तक इस मामले में स्पष्टता की उम्मीद जताई थी, लेकिन ईरान के इनकार ने इस उम्मीद पर पानी फेर दिया। इस अनिश्चितता के कारण एशियाई शेयर बाजार लाल निशान में चले गए और निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया।
इंडोनेशियाई रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर, विदेशी निवेशक चिंतित
इंडोनेशियाई रुपया मंगलवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 17,105 के स्तर को पार कर गया, जो इसका अब तक का सबसे निचला स्तर है। बैंक इंडोनेशिया (बैंक ऑफ इंडोनेशिया) ने रुपये को स्थिर रखने के लिए पहले ही हस्तक्षेप किया था, लेकिन यह प्रयास विफल रहा। इंडोनेशिया, कई अन्य उभरती एशियाई अर्थव्यवस्थाओं की तरह, एक शुद्ध तेल आयातक है। मध्य पूर्व में युद्ध के कारण तेल की कीमतों में तेज उछाल ने इसकी अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा दिया है। इसके साथ ही, इंडोनेशिया में वित्तीय अनुशासन, केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता और शेयर बाजार के नियमों को लेकर चिंताएं भी विदेशी निवेशकों को देश से दूर कर रही हैं।
विशेषज्ञों की राय: बाहरी कारक और तेल की कीमतें बनीं मुख्य चिंता
ओसीबीसी के एक मुद्रा रणनीतिकार, क्रिस्टोफर वोंग ने कहा, "बाहरी कारक अभी भी प्रमुख चालक बने हुए हैं, और कमजोर जोखिम भावना के साथ-साथ ईरान संघर्ष के अधिक लंबे समय तक चलने के जोखिमों के बीच तेल की कीमतों में वृद्धि, जापान के बाहर की अन्य क्षेत्रीय मुद्राओं के साथ आईडीआर (इंडोनेशियाई रुपया) पर दबाव डालना जारी रखेगी।" उन्होंने यह भी कहा कि बाजारों को शायद होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की समय-सीमा पर स्पष्टता की आवश्यकता है और क्या ईरान को गारंटी मिलती है। स्पष्टता की कमी के कारण क्षेत्रीय मुद्राओं (AxJs) पर दबाव बना रह सकता है।
विदेशी निवेशकों का पलायन जारी, इंडोनेशियाई शेयर बाजार में भारी बिकवाली
एलएसईजी (LSEG) के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी निवेशकों ने अप्रैल के पहले तीन कारोबारी सत्रों में 1.60 ट्रिलियन rupiah (लगभग 93.62 मिलियन अमेरिकी डॉलर) के इंडोनेशियाई शेयर बेचे हैं। यह मार्च में हुई 23.34 ट्रिलियन rupiah की भारी बिकवाली के अतिरिक्त है। यह आंकड़ा इंडोनेशियाई शेयर बाजार से विदेशी पूंजी के बड़े पैमाने पर पलायन को दर्शाता है।
अन्य एशियाई मुद्राएं भी दबाव में, मलेशियाई रिंगित और फिलीपीन पेसो में गिरावट
इंडोनेशियाई रुपये के अलावा, एशिया की अन्य मुद्राएं भी दबाव में रहीं। मलेशियाई रिंगित और फिलीपीन पेसो में लगभग 0.2% की गिरावट आई, जबकि सिंगापुर डॉलर स्थिर रहा। यह स्थिति ईरान द्वारा युद्धविराम सौदे को अस्वीकार करने और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की धमकियों के पूरी तरह से मूल्य निर्धारण न होने के कारण उत्पन्न हुई है।
एशियाई शेयर बाजारों में गिरावट, MSCI ASEAN इंडेक्स नीचे
ईरान के युद्धविराम को अस्वीकार करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने से इनकार करने के कारण एशियाई निवेशकों ने सांस रोक ली। अधिकांश क्षेत्रीय शेयर बाजारों में गिरावट देखी गई। सिंगापुर, इंडोनेशिया और मलेशिया के इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्स में गिरावट आई, जिससे MSCI ASEAN इंडेक्स 0.2% नीचे चला गया। हालांकि, मनीला का शेयर बाजार नुकसान से उबरने में कामयाब रहा और 0.2% ऊपर कारोबार कर रहा था।
थाईलैंड में आश्चर्यजनक सीपीआई गिरावट से शेयरों में उछाल
थाईलैंड में, मार्च के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) में आश्चर्यजनक गिरावट के कारण शेयर बाजार में 0.7% का उछाल देखा गया। हालांकि, मंत्रालय ने दूसरी तिमाही में मुद्रास्फीति में संभावित महत्वपूर्ण वृद्धि की चेतावनी दी है। फरवरी में अप्रत्याशित ब्याज दर में कटौती के बाद, बैंक ऑफ थाईलैंड के गवर्नर ने पिछले हफ्ते कहा था कि इस साल मुद्रास्फीति 3% तक पहुंच सकती है, लेकिन फिलहाल किसी बड़े मौद्रिक नीति बदलाव की आवश्यकता नहीं है। अगली नीति समीक्षा 29 अप्रैल को होनी है।
फिलीपींस में मुद्रास्फीति उम्मीद से ज्यादा, केंद्रीय बैंक की चिंता बढ़ी
फिलीपींस में स्थिति थोड़ी अलग रही। मार्च में वार्षिक मुद्रास्फीति उम्मीदों से अधिक रही और केंद्रीय बैंक की लक्ष्य सीमा को पार कर गई। यह पिछले हफ्ते केंद्रीय बैंक की अप्रत्याशित ऑफ-साइकिल बैठक के बाद हुआ, जहां उसने अपनी नीतिगत दर 4.25% पर अपरिवर्तित रखी थी।
मुख्य बातें (HIGHLIGHTS):
- इंडोनेशिया के 10-वर्षीय बॉन्ड पर यील्ड 6.624% पर इंडोनेशिया के सरकारी बॉन्ड पर प्रतिफल (yield) 6.624% पर बना हुआ है, जो देश की वित्तीय स्थिति पर निवेशकों के विश्वास को दर्शाता है।
- दक्षिण कोरियाई दूत तेल आपूर्ति सुरक्षित करने के लिए कजाकिस्तान, ओमान और सऊदी अरब का दौरा करेंगे दक्षिण कोरिया अपने तेल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कूटनीतिक प्रयास कर रहा है। इसके तहत, एक दक्षिण कोरियाई दूत कजाकिस्तान, ओमान और सऊदी अरब की यात्रा करेगा। यह कदम वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता के बीच ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
- मलेशियाई जहाज ने होर्मुज के माध्यम से सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित किया एक अच्छी खबर यह है कि एक मलेशियाई जहाज ने होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित मार्ग प्राप्त कर लिया है। यह उन चिंताओं के बीच एक राहत की बात है कि इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर व्यापार बाधित हो सकता है।
मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर वैश्विक वित्तीय बाजारों पर पड़ रहा है। ईरान द्वारा युद्धविराम की मांग को ठुकराने और होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद रखने के फैसले ने निवेशकों के बीच अनिश्चितता और भय का माहौल पैदा कर दिया है। यह जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण मार्ग है, और इसके बंद होने से तेल की कीमतों में और वृद्धि होने की आशंका है। यह वृद्धि उन देशों के लिए विशेष रूप से चिंताजनक है जो तेल के शुद्ध आयातक हैं, जैसे कि इंडोनेशिया।
मुद्रास्फीति और मौद्रिक नीति: एक जटिल समीकरण
एशियाई देशों के लिए मुद्रास्फीति एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। थाईलैंड में मार्च में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) में अप्रत्याशित गिरावट देखी गई, जिससे शेयरों में उछाल आया। हालांकि, मंत्रालय ने दूसरी तिमाही में मुद्रास्फीति में वृद्धि की चेतावनी दी है। दूसरी ओर, फिलीपींस में मुद्रास्फीति उम्मीदों से अधिक रही, जिससे केंद्रीय बैंक की चिंताएं बढ़ गई हैं। केंद्रीय बैंकों के लिए यह एक मुश्किल संतुलन बनाना है: एक तरफ मुद्रास्फीति को नियंत्रित करना है, और दूसरी तरफ आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है।
निवेशकों का विश्वास और विदेशी पूंजी का प्रवाह
विदेशी निवेशकों का विश्वास एशियाई बाजारों के लिए महत्वपूर्ण है। इंडोनेशिया से विदेशी पूंजी का बड़े पैमाने पर पलायन चिंता का विषय है। यह पलायन न केवल शेयर बाजार को प्रभावित करता है, बल्कि मुद्रा की स्थिरता पर भी दबाव डालता है। निवेशकों को आकर्षित करने के लिए, देशों को न केवल आर्थिक स्थिरता प्रदान करनी होगी, बल्कि वित्तीय अनुशासन, केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता और पारदर्शी नियामक ढांचे जैसे कारकों पर भी ध्यान देना होगा।
तेल की कीमतों का प्रभाव और ऊर्जा सुरक्षा
तेल की कीमतों में वृद्धि का सीधा असर उन देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ता है जो तेल के शुद्ध आयातक हैं। इंडोनेशिया जैसे देश इस प्रभाव से विशेष रूप से प्रभावित होते हैं। दक्षिण कोरिया जैसे देश अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कूटनीतिक प्रयास कर रहे हैं, जो वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता के प्रति उनकी संवेदनशीलता को दर्शाता है।
निष्कर्ष: अनिश्चितता का दौर जारी
कुल मिलाकर, एशियाई बाजार वर्तमान में भू-राजनीतिक अनिश्चितता, बढ़ती तेल की कीमतों और मुद्रास्फीति की चिंताओं से जूझ रहे हैं। ईरान के रुख और होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति पर बारीकी से नजर रखी जा रही है, क्योंकि यह वैश्विक अर्थव्यवस्था पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है। निवेशकों को सतर्क रहने और इन विकसित हो रही स्थितियों पर कड़ी नजर रखने की सलाह दी जाती है।