Mandatory Audit On Adolescent Pregnancy In Karnataka Governments Big Step Focus On Causes And Solutions
कर्नाटक में किशोर गर्भावस्था का अनिवार्य ऑडिट: कारण और समाधान की ओर सरकार का कदम
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कर्नाटक सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। अब राज्य में 10 से 18 साल की लड़कियों के गर्भधारण के हर मामले की जांच होगी। इसे एडोलेसेंट प्रेगनेंसी ऑडिट कहा जाएगा। इसका उद्देश्य कम उम्र में गर्भधारण के कारणों का पता लगाना और रोकथाम के उपाय करना है। स्वास्थ्य, शिक्षा और समाज कल्याण विभाग मिलकर काम करेंगे।
कर्नाटक सरकार ने मंगलवार को एक बड़ा फैसला लिया है। अब राज्य में 10 से 18 साल की उम्र की लड़कियों के गर्भधारण के हर मामले की जांच की जाएगी। इसका मकसद यह पता लगाना है कि ये लड़कियां गर्भवती क्यों हो रही हैं और इसके पीछे क्या कारण हैं। इस जांच को 'एडोलेसेंट प्रेगनेंसी ऑडिट' कहा जाएगा और यह हर तालुका के स्वास्थ्य अधिकारी (THO) के लिए अनिवार्य होगा। इस कदम से कम उम्र में होने वाली गर्भधारण की घटनाओं को जल्दी पहचानने, सही सलाह देने और रोकने के उपाय करने में मदद मिलेगी। स्वास्थ्य, शिक्षा और समाज कल्याण विभाग मिलकर काम करेंगे। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) और राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (RKSK) जैसे मौजूदा कार्यक्रमों का भी इसमें इस्तेमाल किया जाएगा।
सरकार ने कहा है कि कम उम्र में गर्भधारण एक गंभीर चिंता का विषय है। इससे मां के स्वास्थ्य, नवजात शिशु के जन्म के समय की समस्याओं और सामाजिक-आर्थिक विकास पर बुरा असर पड़ता है। 10 से 18 साल की लड़कियों में गर्भधारण से मां को कई तरह की परेशानियां हो सकती हैं। बच्चों के जन्म के समय भी दिक्कतें आ सकती हैं। साथ ही, लड़कियां पढ़ाई छोड़ देती हैं और समाज में कमजोर हो जाती हैं।अब से, राज्य में जितनी भी कम उम्र की लड़कियों के गर्भवती होने के मामले सामने आएंगे, उन्हें सरकारी और निजी अस्पतालों को 'रिप्रोडक्टिव एंड चाइल्ड हेल्थ (RCH)' प्लेटफॉर्म पर दर्ज कराना होगा। इस जांच में कई सामाजिक और मेडिकल कारणों को देखा जाएगा। जैसे कि लड़की की शादी की उम्र क्या थी, उसकी पढ़ाई कितनी हुई है, क्या उसे प्रजनन स्वास्थ्य के बारे में जानकारी है, क्या उसे गर्भनिरोधक साधन आसानी से मिल पाते हैं, और परिवार में क्या परेशानियां हैं।
यह जांच यह भी देखेगी कि RKSK, एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS) और स्कूल स्वास्थ्य कार्यक्रमों जैसी योजनाओं का लाभ इन लड़कियों तक पहुंच रहा है या नहीं। इससे यह पता चलेगा कि कहीं सेवाओं को पहुंचाने में कोई कमी तो नहीं रह गई है। हर तालुका स्तर पर एक खास जांच समिति बनाई जाएगी। इस समिति का मुखिया तालुका स्वास्थ्य अधिकारी (THO) होंगे। इसमें प्राइमरी हेल्थ सेंटर, फील्ड हेल्थ स्टाफ, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और स्कूलों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।
सरकार ने यह भी कहा है कि कम उम्र की लड़कियों को सही सलाह (counselling) मिलनी चाहिए। इसके लिए 'स्नेहा सेंटर्स' जैसी जगहों का इस्तेमाल किया जाएगा। गर्भनिरोधक साधन आसानी से उपलब्ध कराए जाएंगे। उन लड़कियों पर खास ध्यान दिया जाएगा जो कमजोर हैं, जैसे स्कूल छोड़ चुकी लड़कियां, जो एक जगह से दूसरी जगह जाती हैं (migrants) और जो गरीब परिवारों से हैं।
जांच में लड़की की शादी की उम्र, पढ़ाई का स्तर, प्रजनन स्वास्थ्य के बारे में जानकारी, गर्भनिरोधक साधन और सलाह सेवाओं तक पहुंच, और परिवार की सामाजिक-आर्थिक स्थिति जैसी बातों की जांच की जाएगी। सरकार ने यह भी साफ किया है कि इन सभी मामलों की जानकारी को पूरी तरह गोपनीय रखा जाएगा। बच्चों की सुरक्षा से जुड़े कानूनों का पालन किया जाएगा। साथ ही, कानूनी तौर पर जो जानकारी देनी जरूरी है, उसका भी ध्यान रखा जाएगा। यह कदम कर्नाटक में कम उम्र में होने वाली गर्भधारण की समस्या से निपटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।