पश्चिम एशिया युद्ध का वैश्विक खाद्य सुरक्षा पर गंभीर असर: IMF, विश्व बैंक और WFP की चेतावनी

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पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का वैश्विक खाद्य सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ रहा है। आईएमएफ, विश्व बैंक और विश्व खाद्य कार्यक्रम ने चेतावनी दी है कि ऊर्जा बाजारों में उथल-पुथल से खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ेंगी। गरीब और कमजोर लोग सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। माल ढुलाई की समस्याएँ भी बढ़ेंगी।

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अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ( आईएमएफ ), विश्व बैंक और विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) ने चेतावनी दी है कि पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों में भारी उथल-पुथल मचा दी है, जिसका सीधा असर खाद्य पदार्थों की कीमतों और दुनिया भर में खाद्य सुरक्षा पर पड़ेगा। इन तीनों प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के मुखियाओं ने एक संयुक्त बयान जारी कर कहा है कि बढ़ती खाद्य कीमतों का सबसे ज़्यादा बोझ दुनिया के गरीब और कमज़ोर लोगों पर पड़ेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि तेल, गैस और खाद (उर्वरक) की कीमतों में अचानक आई तेज़ी, साथ ही माल ढुलाई में आ रही दिक्कतों के चलते, खाने-पीने की चीज़ों के दाम बढ़ेंगे और लोगों को भोजन की कमी का सामना करना पड़ेगा।

ये संस्थाएं इस गंभीर स्थिति पर बारीकी से नज़र रख रही हैं और संकट से जूझ रहे लोगों की मदद के लिए अपने सभी संसाधनों को एक साथ लाने का प्रयास करेंगी। बयान में यह भी बताया गया है कि खासकर कम आय वाले और दूसरे देशों से अनाज आयात करने वाले देशों में, ईंधन और खाने-पीने की चीज़ों के बढ़ते दामों का असर सबसे ज़्यादा उन घरों पर पड़ेगा जिनकी सरकारें आर्थिक रूप से ज़्यादा मदद नहीं कर सकतीं।
तीनों संस्थाओं ने भरोसा दिलाया है कि वे लोगों की जान और रोज़ी-रोटी बचाने के लिए, साथ ही स्थिरता, विकास और रोज़गार सुनिश्चित करने के लिए लंबे समय तक मदद जारी रखेंगी। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ़्ते का युद्धविराम समझौता हुआ है। इससे पहले, 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर हमला किया था क्योंकि ईरान ने अपने परमाणु ईंधन के भंडार छोड़ने से इनकार कर दिया था।

यह युद्ध सिर्फ़ पश्चिम एशिया तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। तेल और गैस जैसी ज़रूरी चीज़ों के दाम बढ़ने से हर चीज़ महंगी हो रही है। जब माल को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने का खर्च बढ़ जाता है, तो उसका असर सीधे तौर पर बाज़ार में मिलने वाली चीज़ों की कीमतों पर पड़ता है।

खासकर गरीब देशों के लिए यह एक बड़ी चुनौती है। उनके पास पहले से ही पैसे की कमी होती है, और जब खाने-पीने की चीज़ें महंगी हो जाती हैं, तो वे अपने नागरिकों का पेट भरने में मुश्किल महसूस करते हैं। आईएमएफ, विश्व बैंक और डब्ल्यूएफपी जैसी संस्थाएं इन देशों की मदद करने की कोशिश कर रही हैं ताकि भुखमरी जैसी स्थिति पैदा न हो।

यह स्थिति हमें याद दिलाती है कि दुनिया कितनी आपस में जुड़ी हुई है। एक जगह होने वाली घटना का असर दूसरी जगह भी महसूस किया जा सकता है। इसलिए, शांति और स्थिरता बनाए रखना बहुत ज़रूरी है ताकि ऐसे संकटों से बचा जा सके।

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