ECB की लगार्ड: मौद्रिक स्थिति मजबूत, पर अर्थव्यवस्था, उत्पादकता, सार्वजनिक वित्त में सुधार की गुंजाइश

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ईसीबी प्रमुख क्रिस्टीन लैगार्ड ने कहा है कि मौद्रिक नीति की स्थिति मजबूत है। उन्होंने अर्थव्यवस्था, उत्पादकता और सार्वजनिक वित्त में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। लैगार्ड का मानना है कि इन क्षेत्रों में और अधिक काम करने की गुंजाइश है। यह बयान ईसीबी की समग्र आर्थिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की सोच को दर्शाता है।

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ईसीबी ( ECB ) की प्रमुख क्रिस्टीन लैगार्ड ने कहा है कि वे सतर्क हैं और मौद्रिक नीति ( monetary policy ) की स्थिति अच्छी है, लेकिन अर्थव्यवस्था , उत्पादकता और सार्वजनिक वित्त (public finances) में सुधार की गुंजाइश है। उन्होंने यह बात हाल ही में कही है, जिससे यह साफ है कि वे मौजूदा आर्थिक हालात पर पैनी नजर रखे हुए हैं।

लैगार्ड ने इस बात पर जोर दिया कि मौद्रिक नीति के मामले में ईसीबी एक मजबूत स्थिति में है। इसका मतलब है कि ब्याज दरों (interest rates) और पैसे की सप्लाई को लेकर जो फैसले लिए गए हैं, वे सही दिशा में हैं। लेकिन, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि देश की अर्थव्यवस्था को और बेहतर करने की जरूरत है। साथ ही, चीजों को बनाने की क्षमता यानी उत्पादकता ( productivity ) और सरकार के खर्चे-आमदनी का हिसाब-किताब यानी सार्वजनिक वित्त (public finances) में भी सुधार की काफी गुंजाइश है।
उन्होंने कहा, "मैं सतर्क हूं, हमारी मौद्रिक स्थिति (monetary position) अच्छी है, लेकिन अर्थव्यवस्था, उत्पादकता, सार्वजनिक वित्त (public finances) में और सुधार हो सकता है।" यह बयान ईसीबी की सोच को दर्शाता है कि वे सिर्फ पैसे के प्रबंधन पर ही ध्यान नहीं दे रहे, बल्कि देश के समग्र आर्थिक स्वास्थ्य को भी सुधारना चाहते हैं।

सरल शब्दों में कहें तो, लैगार्ड का कहना है कि पैसे को लेकर तो सब ठीक है, लेकिन देश की फैक्ट्रियां और कंपनियां और ज्यादा सामान बनाएं, लोग और ज्यादा मेहनत से काम करें और सरकार अपने खर्चों को समझदारी से चलाए, इन सब पर और ध्यान देने की जरूरत है। यह एक तरह से सभी को मिलकर अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने का आह्वान है।