रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर, डॉलर के मुकाबले 91.58 पर पहुंचा, विदेशी पूंजी निकासी का असर

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भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 91.58 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर आ गया है। विदेशी निवेशकों द्वारा लगातार पैसा निकालने से यह गिरावट आई है। यूरोप के साथ बढ़ते तनाव और शेयर बाजार में कमजोरी ने निवेशकों को चिंतित कर दिया है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भी वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता का संकेत दे रही है।

rupee hits record low falls to 9158 against dollar impacted by foreign capital outflow and global tensions
मुंबई, 21 जनवरी (भाषा) - भारतीय रुपया बुधवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 61 पैसे गिरकर 91.58 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर आ गया। विदेशी निवेशक लगातार पैसा निकाल रहे हैं, जिससे रुपये में यह गिरावट आई है। यूरोप के साथ बढ़ते तनाव और घरेलू शेयर बाजार में गिरावट ने भी निवेशकों को चिंता में डाल दिया है।

विदेशी मुद्रा बाजार में, रुपया 91.05 प्रति डॉलर पर खुला और कारोबार के दौरान 91.58 के स्तर तक गिर गया। यह पिछले दिन के मुकाबले 61 पैसे की बड़ी गिरावट है। मंगलवार को भी रुपया 7 पैसे गिरकर 90.97 पर बंद हुआ था। इससे पहले, 16 दिसंबर 2025 को रुपया 90.93 के निचले स्तर पर बंद हुआ था और कारोबार के दौरान 91.14 तक गिर गया था।
विदेशी निवेशकों की चिंता का एक बड़ा कारण ग्रीनलैंड मुद्दा और यूरोप के साथ संभावित शुल्क को लेकर बढ़ता तनाव है। इन वैश्विक चिंताओं के चलते निवेशक सतर्क हो गए हैं और अपना पैसा निकाल रहे हैं। इसके अलावा, भारतीय शेयर बाजार में भी गिरावट देखी गई, जिसने निवेशकों के भरोसे को और कम कर दिया।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.08 प्रतिशत गिरकर 98.56 पर रहा।

घरेलू शेयर बाजार की बात करें तो, सेंसेक्स 266.58 अंक गिरकर 81,913.89 अंक पर आ गया। वहीं, निफ्टी 83.10 अंक फिसलकर 25,149.40 अंक पर बंद हुआ। शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) मंगलवार को बिकवाल रहे। उन्होंने शुद्ध रूप से 2,938.33 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।

अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड का भाव भी 1.11 प्रतिशत की गिरावट के साथ 64.20 डॉलर प्रति बैरल रहा। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भी वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता का संकेत दे रही है।

कुल मिलाकर, रुपये में यह गिरावट वैश्विक और घरेलू दोनों तरह की चिंताओं का नतीजा है। विदेशी पूंजी की निकासी, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और शेयर बाजार में कमजोरी ने मिलकर भारतीय मुद्रा पर दबाव बनाया है। निवेशकों की नजर अब आगे आने वाले आर्थिक आंकड़ों और वैश्विक घटनाओं पर रहेगी, जो रुपये की दिशा तय करेंगी।