मेधा पाटकर ने शिक्षा के निजीकरण पर जताई चिंता, आदिवासी-ग्रामीण छात्रों के अधिकारों पर खतरा

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सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने शिक्षा के निजीकरण पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि इससे आदिवासी और ग्रामीण छात्रों को शिक्षा का अधिकार नहीं मिल पा रहा है। पाटकर ने आरोप लगाया कि सरकारें स्कूल बंद कर रही हैं। संविधान में शिक्षा को मौलिक अधिकार बताया गया है, लेकिन मौजूदा व्यवस्था इसे व्यापार बना रही है।

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नांदेड़, 24 जनवरी (PTI) सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने शनिवार को शिक्षा के तेजी से हो रहे निजीकरण पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इस वजह से आदिवासी और ग्रामीण इलाकों के छात्रों को शिक्षा का अधिकार नहीं मिल पा रहा है। पाटकर नांदेड़ एजुकेशन सोसाइटी के एक कार्यक्रम में बोल रही थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारें स्कूल बंद कर रही हैं। उनका कहना है कि संविधान में शिक्षा को मौलिक अधिकार बताया गया है। लेकिन मौजूदा व्यवस्था शिक्षा को व्यापार बना रही है। इससे आदिवासी और ग्रामीण इलाकों के बच्चों को शिक्षा से वंचित रहना पड़ रहा है।

स्वामी रामानंद तीर्थ मराठवाड़ा विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. मनोहर च asker भी इस कार्यक्रम में मौजूद थे। उन्होंने कहा कि लोगों के जुड़ने से शिक्षा के क्षेत्र में बड़े बदलाव आ रहे हैं। उन्होंने आधुनिक पाठ्यक्रम को जोड़ने की जरूरत पर जोर दिया।