पुडुचेरी के मुख्यमंत्री एन. रंगसामी का इस्तीफा: NDA की जीत के बाद बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम

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पुडुचेरी के मुख्यमंत्री एन. रंगसामी ने इस्तीफा दे दिया है। यह घटनाक्रम विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद हुआ है। एनडीए गठबंधन ने चुनाव जीता है। रंगसामी की पार्टी एआईएनआरसी ने 12 सीटें जीतीं। भाजपा और एआईएडीएमके ने भी सीटें हासिल कीं। विपक्षी दलों में डीएमके और कांग्रेस शामिल हैं। रंगसामी ने थट्टांचवाड़ी सीट से जीत दर्ज की।

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पुडुचेरी के मुख्यमंत्री एन. रंगसामी ने गुरुवार को उप-राज्यपाल के. कैलाशनाथन को अपना इस्तीफा सौंपा। यह कदम पुडुचेरी विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद आया है, जिसमें राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने सत्ता बरकरार रखी। एन. रंगसामी की पार्टी ऑल इंडिया एन.आर. कांग्रेस ( AINRC ) ने 12 सीटें जीतीं, जबकि भाजपा ने चार और अन्नाद्रमुक (AIADMK) ने एक सीट हासिल की। विपक्षी दलों में डीएमके (DMK) ने पांच और कांग्रेस ने एक सीट जीती। वहीं, टीवीके (TVK) ने दो सीटों पर जीत दर्ज की।

एन. रंगसामी ने थट्टांचवाड़ी विधानसभा सीट से 4,441 वोटों के बड़े अंतर से जीत हासिल की। उन्होंने सोमवार को हुए मतदान की गिनती के बाद यह जीत दर्ज की। रंगसामी पुडुचेरी के एक अनुभवी नेता हैं और मई 2021 से मुख्यमंत्री का पद संभाल रहे थे। इससे पहले भी वे कई बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं। उन्होंने 2001 से 2008 तक और फिर 2011 से 2016 तक यह पद संभाला। 2011 में, उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से अलग होकर ऑल इंडिया एन.आर. कांग्रेस (AINRC) की स्थापना की थी।
पुडुचेरी की राजनीति में रंगसामी का सफर दशकों पुराना है और इसने कई चुनावी बदलाव देखे हैं। 1970 के दशक में वी. पेथापेरुमल जैसे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेता प्रभावशाली थे, जबकि 1977 के चुनावों में जनता पार्टी का उदय हुआ। 1980 और 1990 के दशक में जनता दल जैसी पार्टियों ने भूमिका निभाई। 1991 तक, रंगसामी खुद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रतिनिधि के तौर पर उभरे।

राजनीतिक परिदृश्य लगातार बदलता रहा। 1996, 2001 और 2006 के चुनावों में भी कई बदलाव देखे गए। 2011 में, अशोक आनंद जैसे नेताओं के नेतृत्व में AINRC की स्थिति मजबूत हुई। बाद में, 2019 के उपचुनाव में डीएमके (DMK) के के. वेंकटसन ने जीत हासिल की। इसके बाद, 2021 में रंगसामी AINRC के बैनर तले फिर से सत्ता में लौटे, जिसने पुडुचेरी के राजनीतिक परिदृश्य में एक और बड़ा बदलाव लाया।

एन. रंगसामी ने पुडुचेरी के उप-राज्यपाल के. कैलाशनाथन को राजभवन में अपना इस्तीफा सौंपा। यह घटनाक्रम पुडुचेरी विधानसभा चुनावों के नतीजों के बाद हुआ है। इन चुनावों में एनडीए गठबंधन ने जीत हासिल की और सत्ता में वापसी की। एन. रंगसामी की पार्टी एआईएनआरसी (AINRC) ने 12 सीटें जीतीं, जो सरकार बनाने के लिए पर्याप्त थीं। वहीं, भाजपा ने चार और एआईएडीएमके (AIADMK) ने एक सीट जीती। विपक्षी दलों में डीएमके (DMK) ने पांच और कांग्रेस ने एक सीट पर जीत दर्ज की। टीवीके (TVK) ने भी दो सीटें जीतकर अपना खाता खोला।

रंगसामी ने थट्टांचवाड़ी विधानसभा सीट से 4,441 वोटों के बड़े अंतर से जीत हासिल की। उन्होंने सोमवार को हुए मतदान की गिनती के बाद यह जीत दर्ज की। रंगसामी पुडुचेरी के एक जाने-माने नेता हैं और मई 2021 से मुख्यमंत्री का पद संभाल रहे थे। इससे पहले भी वे कई बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं। उन्होंने 2001 से 2008 तक और फिर 2011 से 2016 तक यह पद संभाला। 2011 में, उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से अलग होकर अपनी पार्टी ऑल इंडिया एन.आर. कांग्रेस (AINRC) की स्थापना की थी।

पुडुचेरी की राजनीति में रंगसामी का सफर दशकों पुराना है और इसने कई चुनावी बदलाव देखे हैं। 1970 के दशक में वी. पेथापेरुमल जैसे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेता प्रभावशाली थे, जबकि 1977 के चुनावों में जनता पार्टी का उदय हुआ। 1980 और 1990 के दशक में जनता दल जैसी पार्टियों ने भूमिका निभाई। 1991 तक, रंगसामी खुद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रतिनिधि के तौर पर उभरे।

राजनीतिक परिदृश्य लगातार बदलता रहा। 1996, 2001 और 2006 के चुनावों में भी कई बदलाव देखे गए। 2011 में, अशोक आनंद जैसे नेताओं के नेतृत्व में एआईएनआरसी (AINRC) की स्थिति मजबूत हुई। बाद में, 2019 के उपचुनाव में डीएमके (DMK) के के. वेंकटसन ने जीत हासिल की। इसके बाद, 2021 में रंगसामी एआईएनआरसी (AINRC) के बैनर तले फिर से सत्ता में लौटे, जिसने पुडुचेरी के राजनीतिक परिदृश्य में एक और बड़ा बदलाव लाया।

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