भारत-फ्रांस-यूएई त्रिपक्षीय बैठक: रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर जोर

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भारत, फ्रांस और यूएई ने अबू धाबी में त्रिपक्षीय बैठक की। तीनों देशों ने अपनी रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने का संकल्प लिया। इस बैठक में द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा हुई और भविष्य की योजनाओं पर सहमति बनी। यह सहयोग क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक विकास को बढ़ावा देगा।

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अबू धाबी, 7 मई (IANS) भारत के विदेश सचिव विक्रम मिश्री ने गुरुवार को अबू धाबी में भारत-फ्रांस-संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ढांचे के तहत एक त्रिपक्षीय बैठक में हिस्सा लिया। इस बैठक में UAE की मंत्री रीम अल हाशमी और फ्रांस के विदेश मंत्रालय के महासचिव मार्टिन ब्रिएंस भी मौजूद थे। विदेश मंत्रालय के अनुसार, तीनों देशों ने अपनी साझेदारी को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई और एक तय समय-सीमा के साथ एक योजना पर सहमति जताई।

इस दौरे के दौरान, विदेश सचिव मिश्री ने मुबाडाला इन्वेस्टमेंट कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ खल्डून अल मुबारक से भी मुलाकात की। इससे पहले गुरुवार को, विदेश सचिव ने UAE की अंतर्राष्ट्रीय सहयोग मामलों की मंत्री रीम अल हाशमी से भी मुलाकात की। दोनों पक्षों ने भारत और UAE के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी की प्रगति की समीक्षा की।
विदेश मंत्रालय ने बताया कि जनवरी 2026 में UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की भारत यात्रा और फरवरी 2026 में अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की भारत यात्रा के दौरान लिए गए फैसलों पर सकारात्मक मूल्यांकन किया गया।

दोनों देशों ने व्यापार, निवेश, आर्थिक सहयोग , ऊर्जा, कनेक्टिविटी, रक्षा और सुरक्षा, वित्तीय प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, शिक्षा, संस्कृति और लोगों के बीच संबंधों जैसे क्षेत्रों में चल रहे द्विपक्षीय सहयोग की भी समीक्षा की। यह समीक्षा दिसंबर 2025 में हुई 16वीं संयुक्त आयोग की बैठक और पांचवीं रणनीतिक वार्ता के नतीजों पर आधारित थी, जिसकी सह-अध्यक्षता भारत के विदेश मंत्री और UAE के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री ने की थी। मंत्रालय ने यह भी बताया कि द्विपक्षीय व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने के लिए नई पहलों की पहचान की गई।

इस हफ्ते की शुरुआत में, प्रधानमंत्री मोदी ने UAE के फुजैराह पर हुए हमले की निंदा की थी, जिसमें तीन भारतीय नागरिक घायल हुए थे। उन्होंने नागरिकों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने को "अस्वीकार्य" बताया था। प्रधानमंत्री मोदी ने UAE के प्रति भारत की एकजुटता व्यक्त की थी और सभी मुद्दों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए बातचीत और कूटनीति के माध्यम से समर्थन दोहराया था।

यह त्रिपक्षीय बैठक भारत, फ्रांस और UAE के बीच बढ़ते सहयोग का एक महत्वपूर्ण कदम है। तीनों देश क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम करने पर सहमत हुए हैं। इस बैठक से यह भी स्पष्ट होता है कि भारत UAE के साथ अपने संबंधों को कितना महत्व देता है।

विदेश सचिव मिश्री की UAE की यात्रा दोनों देशों के बीच मजबूत होते रिश्तों का एक और प्रमाण है। व्यापार, निवेश और रक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग को और बढ़ाने पर जोर दिया गया। यह दिखाता है कि दोनों देश एक-दूसरे के विकास में भागीदार बनना चाहते हैं।

UAE के नेताओं के साथ हुई मुलाकातें भारत और UAE के बीच पहले से मौजूद मजबूत संबंधों को और भी मजबूत करेंगी। जनवरी 2026 और फरवरी 2026 में हुई उच्च-स्तरीय यात्राओं के दौरान लिए गए फैसलों पर हुई चर्चा से पता चलता है कि दोनों देश उन फैसलों को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

यह बैठक भारत की विदेश नीति में UAE के बढ़ते महत्व को भी दर्शाती है। भारत, UAE के साथ अपने संबंधों को मजबूत करके पश्चिम एशिया में अपनी स्थिति को और मजबूत करना चाहता है।

फुजैराह पर हुए हमले की निंदा और शांतिपूर्ण समाधान पर जोर देना भारत की विदेश नीति का एक महत्वपूर्ण पहलू है। यह दिखाता है कि भारत किसी भी तरह की हिंसा का विरोध करता है और शांतिपूर्ण तरीके से समस्याओं को सुलझाने में विश्वास रखता है।

कुल मिलाकर, यह बैठक भारत, फ्रांस और UAE के बीच सहयोग को नई दिशा देने वाली साबित हुई है। इससे तीनों देशों के बीच आपसी विश्वास और सहयोग में वृद्धि होगी।

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