Pakistan Petrol Crosses 400 Imf Warning Double Blow Of Economic Crisis And Inflation
पाकिस्तान की आर्थिक तंगी: पेट्रोल ₹400 के पार, IMF की चेतावनी
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पाकिस्तान गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है। पेट्रोल की कीमतें ₹400 प्रति लीटर के पार हो गई हैं। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने चेतावनी दी है कि तेल की कीमतों में वृद्धि से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर भारी असर पड़ेगा। खाड़ी देशों पर निर्भरता और मध्य पूर्व में संघर्ष ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है।
नई दिल्ली, 8 मई (IANS) पाकिस्तान इन दिनों आर्थिक मुश्किलों से जूझ रहा है। पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल की कीमतें करीब 400 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई हैं, जिससे आम लोगों और सरकार दोनों पर भारी बोझ पड़ रहा है। स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान ने अपनी नीतिगत दर को बढ़ाकर 11.5 प्रतिशत कर दिया है, जिससे कर्जदारों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। यह जानकारी एक रिपोर्ट में सामने आई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, जहां एक तरफ आम जनता महंगाई की मार झेल रही है, वहीं सरकार भी मुश्किल और अलोकप्रिय फैसले लेकर अपना राजनीतिक नुकसान का जोखिम उठा रही है। पाकिस्तान के पड़ोसी देश की केंद्रीय बैंक ने अप्रैल में महंगाई को काबू करने के लिए यह कदम उठाया है। अप्रैल में महंगाई दर बढ़कर 10.9 प्रतिशत हो गई थी, जो मार्च में 7.3 प्रतिशत थी।पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था खाड़ी देशों पर बहुत ज्यादा निर्भर है। ऊर्जा आयात और वहां काम करने वाले पाकिस्तानी मजदूरों से आने वाली कमाई पर यह निर्भरता, मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के कारण उसे और भी कमजोर बना रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि महंगी ऊर्जा की खेप के अलावा, खाड़ी देशों में निर्माण कार्य धीमा पड़ने, वहां की वित्तीय स्थिति टाइट होने या युद्ध के कारण नौकरियों में देरी होने से पाकिस्तान के मजदूरों की आय और पूंजी प्रवाह पर असर पड़ सकता है।
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) का अनुमान है कि तेल की कीमतों में औसतन 10 प्रतिशत की वृद्धि होने पर मध्य पूर्व, उत्तरी अफ्रीका, अफगानिस्तान और पाकिस्तान (MENAP) जैसे तेल आयात करने वाले देशों के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में लगभग 0.5 प्रतिशत की कमी आती है और महंगाई लगभग 1 प्रतिशत बढ़ जाती है।
लेकिन पाकिस्तान के लिए, इस तरह के झटके से चालू खाते का घाटा GDP का लगभग 0.3 प्रतिशत और राजकोषीय घाटा लगभग 0.1 प्रतिशत बढ़ जाएगा। वित्तीय वर्ष 2025 में पाकिस्तान की अनुमानित 114.7 ट्रिलियन रुपये की जीडीपी के आधार पर, विश्लेषकों का अनुमान है कि अगर तेल की कीमतें लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी रहती हैं, तो चालू खाते पर पूरे साल में लगभग 1.38 ट्रिलियन रुपये का दबाव आ सकता है। वहीं, राजकोष पर लगभग 459 अरब रुपये का बोझ पड़ेगा। अगर कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो इसका बड़ा असर वित्तीय वर्ष 2027 तक भी देखने को मिल सकता है।
मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष ने पहले से ही नाजुक महंगाई की स्थिति को और खतरनाक बना दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि "होरमुज जलडमरूमध्य का बंद होना और ईरान युद्ध के कारण तेल आपूर्ति में अब तक का सबसे बड़ा व्यवधान आया है, जो दैनिक उत्पादन के नुकसान से मापा जाता है। चरम पर नुकसान प्रतिदिन 12 मिलियन बैरल से अधिक था, जो वैश्विक तेल मांग का लगभग 11.5 प्रतिशत है।"
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि जहां पहले तेल के झटके मुख्य रूप से कच्चे तेल से जुड़े थे, वहीं वर्तमान व्यवधान ने कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइंड ईंधन और उर्वरक आयात को प्रभावित किया है। यह स्थिति पाकिस्तान के लिए दोहरा झटका साबित हो रही है, क्योंकि एक तरफ तो ऊर्जा महंगी हो रही है, वहीं दूसरी तरफ खाड़ी देशों से आने वाली आय और पूंजी प्रवाह पर भी असर पड़ रहा है। यह सब मिलकर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को और भी मुश्किलों में डाल रहा है।