Lucknow To Brainstorm On Future Technologies From Ai To Quantum Technology 1200 Experts
लखनऊ में अंतरराष्ट्रीय संवाद: AI से क्वांटम टेक्नोलॉजी तक, 1200 विशेषज्ञ करेंगे मंथन
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लखनऊ, 20 सितंबर (भाषा) अगले महीने लखनऊ में होने वाले तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संवाद कार्यक्रम में अमेरिका, ब्रिटेन और जर्मनी जैसे देशों के उद्यमी, टेक विशेषज्ञ और बड़ी कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह आयोजन 23 से 25 अक्टूबर तक उत्तर प्रदेश राज्य विधि विज्ञान संस्थान (यूपीएसआईएफएस) में होगा, जिसमें करीब 1,200 नीति-निर्माता, वरिष्ठ अधिकारी, उद्योगपति, वैज्ञानिक, शोधकर्ता, स्टार्टअप, न्यायिक व पुलिस अधिकारी, शिक्षक और विद्यार्थी एक मंच पर आएंगे। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भविष्य की तकनीकों, जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता ( एआई ), क्वांटम टेक्नोलॉजी , साइबर फॉरेंसिक , डेटा सुरक्षा और कानूनी अनुपालन पर विचार-विमर्श करना है, ताकि प्रदेश के युवाओं को नई प्रौद्योगिकी में दक्ष बनाकर रोजगार और नए अवसरों के असीम द्वार खोले जा सकें।
यूपीएसआईएफएस के संस्थापक निदेशक डॉक्टर जी. के. गोस्वामी ने बताया कि इस अंतरराष्ट्रीय संवाद का लक्ष्य नीति, उद्योग और शिक्षा जगत को एक साथ लाना है। उन्होंने कहा, "सबसे अधिक जोर इस बात पर दिया जा रहा है कि शैक्षणिक संस्थान शोध और प्रतिभा तैयार करें तथा युवाओं के लिए इंटर्नशिप, रोजगार तथा नए अवसरों का रास्ता खुले।" यह संवाद उन तकनीकों पर केंद्रित होगा जो आने वाले वर्षों में उद्योग, सुरक्षा और न्याय व्यवस्था में अहम भूमिका निभाएंगी। चर्चा में एआई, रोबोटिक्स, ड्रोन, 3-डी प्रिंटिंग के साथ-साथ क्वांटम कंप्यूटिंग और क्वांटम कम्युनिकेशन जैसे विषय शामिल होंगे। इसके अलावा, पोस्ट-क्वांटम तैयारियों और इस क्षेत्र में राष्ट्रीय क्षमता विकसित करने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी विमर्श किया जाएगा।कार्यक्रम के पहले दिन, 23 अक्टूबर को, विद्यार्थियों और युवा पेशेवरों को सीधे उद्योग जगत से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। कंपनियों और विशेषज्ञों के साथ संवाद के दौरान इंटर्नशिप, सेवायोजन, भविष्य में जरूरी कौशल, तकनीकी मार्गदर्शन और मास्टर क्लास आयोजित करने की योजना है। यह दिन युवाओं को सीधे नौकरी के अवसरों से जोड़ने और उन्हें भविष्य के लिए तैयार करने का एक बड़ा मौका होगा।
24 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय संवाद का मुख्य दिन होगा। इसमें केंद्र और राज्य सरकार के प्रतिनिधियों के साथ-साथ वरिष्ठ नीति-निर्माता, उद्योग जगत के दिग्गज और स्टार्टअप्स की भागीदारी होगी। इस दिन विभिन्न कंपनियों और संस्थानों के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर होने और साझा शोध की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। इसका मुख्य उद्देश्य नीति बनाने वालों और तकनीक विकसित करने वालों के बीच सीधा संवाद स्थापित करना है, ताकि देश की तकनीकी प्रगति को और गति मिल सके।
यह आयोजन उत्तर प्रदेश को तकनीकी नवाचार और रोजगार सृजन के एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। भविष्य की तकनीकों पर हो रहे इस मंथन से न केवल प्रदेश के युवाओं को लाभ होगा, बल्कि देश की सुरक्षा और न्याय व्यवस्था को भी आधुनिक बनाने में मदद मिलेगी। क्वांटम टेक्नोलॉजी जैसे जटिल विषयों पर चर्चा से यह भी पता चलेगा कि हम भविष्य की चुनौतियों के लिए कितने तैयार हैं।
डॉक्टर गोस्वामी ने इस बात पर भी जोर दिया कि इस संवाद के माध्यम से प्रदेश के युवाओं को ऐसी तकनीकों में प्रशिक्षित किया जाएगा जिनकी भविष्य में बहुत मांग होगी। इससे वे न केवल अच्छी नौकरियां पा सकेंगे, बल्कि खुद के स्टार्टअप शुरू करने के लिए भी प्रेरित होंगे। यह एक ऐसा मंच होगा जहां शिक्षा, उद्योग और सरकार मिलकर काम करेंगे ताकि देश को तकनीकी रूप से और मजबूत बनाया जा सके। इस तरह के आयोजन देश के विकास के लिए बहुत जरूरी हैं।