अमेरिका ने अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी की, सूत्रों का खुलासा

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अमेरिका ने अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर ली है। यह जानकारी रॉयटर्स को सूत्रों से मिली है। प्रतिबंधों की घोषणा कब होगी, यह अभी तय नहीं है। लेकिन अगर ऐसा होता है, तो यह वैश्विक स्तर पर युद्ध अपराधों और नरसंहार के मामलों की सुनवाई करने वाली इस अदालत के काम को गंभीर रूप से बाधित कर सकता है। ICC के अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि पूरे संगठन पर प्रतिबंध लगने से आईटी सेवाएं, बीमा, जांचकर्ताओं की नियुक्ति और अमेरिकी कर्मचारियों के वेतन जैसे महत्वपूर्ण काम रुक सकते हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का प्रशासन इस वैश्विक अदालत पर अपना हमला तेज करने की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक, ट्रम्प प्रशासन ने पूरे अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) के खिलाफ प्रतिबंधों का मसौदा तैयार कर लिया है और जल्द ही इसकी घोषणा करने की योजना बना रहा है। यह कदम वैश्विक स्तर पर युद्ध अपराधों और नरसंहार के मामलों की सुनवाई करने वाली इस अदालत के काम को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।
अमेरिकी सरकार ने पहले भी इस अदालत के प्रति अपनी नाराजगी जाहिर की है और इसे कमजोर करने की कोशिशें की हैं। अमेरिकी अधिकारियों की मांग है कि ICC इजरायल के नेताओं के खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट को रद्द करे। साथ ही, अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों के खिलाफ की गई पिछली जांच को भी बंद कर दे।

अमेरिकी विदेश मंत्री ने जुलाई में इस अदालत को अलग-थलग करने का अभियान शुरू किया था। उन्होंने अन्य देशों से भी इस अदालत से हटने का आग्रह किया था। अमेरिका ने पहले भी कई ICC न्यायाधीशों और अभियोजकों पर प्रतिबंध लगाए हैं, लेकिन अब तक अदालत पर सीधे तौर पर कोई कार्रवाई नहीं की गई थी। हालांकि, इस तरह के कदम को हमेशा एक विकल्प के तौर पर देखा जा रहा था।

प्रतिबंधों की घोषणा कब होगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है। वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अधिकारियों के हवाले से बताया है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के दौरान इस हफ्ते ही इस फैसले को अंतिम रूप दिया जा सकता है।

अगर अमेरिका पूरे संगठन और उसके सहयोगियों पर प्रतिबंध लगाता है, तो यह अदालत के काम को बहुत नुकसान पहुंचा सकता है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा लगाए जाने वाले किसी भी प्रतिबंध का मतलब होगा कि अमेरिकी नागरिक और कंपनियां बिना अमेरिकी ट्रेजरी के ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (OFAC) से लाइसेंस लिए अदालत को कोई भी पैसा, सामान या सेवा नहीं दे पाएंगे। बैंक अक्सर ऐसे अमेरिकी प्रतिबंधों का बहुत सख्ती से पालन करते हैं, क्योंकि वे अमेरिकी वित्तीय प्रणाली तक अपनी पहुंच बनाए रखना चाहते हैं।

ICC के रजिस्ट्रार और अध्यक्ष ने चेतावनी दी है कि पूरे संगठन पर प्रतिबंध लगने से अदालत के कई काम प्रभावित हो सकते हैं। इनमें आईटी सेवाओं की खरीद, बीमा, जांचकर्ताओं की नियुक्ति और यहां तक कि दर्जनों अमेरिकी कर्मचारियों को वेतन देने जैसे रोजमर्रा के वित्तीय लेनदेन भी शामिल हैं।

राष्ट्रपति ट्रम्प का इस अदालत के प्रति विरोध उनके पहले कार्यकाल से ही चला आ रहा है। यह विरोध तब और तेज हो गया जब नवंबर 2024 में ट्रम्प के दोबारा राष्ट्रपति चुने जाने के बाद ICC ने गाजा संघर्ष में कथित युद्ध अपराधों और मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया।

अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) की स्थापना 2002 में अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा युद्ध अपराधों, नरसंहार और मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए मुकदमा चलाने के लिए की गई थी। यह अदालत तभी अपना अधिकार क्षेत्र लागू करती है जब कोई सदस्य देश खुद अत्याचारों पर मुकदमा चलाने में असमर्थ या अनिच्छुक हो। अमेरिका कभी भी इस अदालत का सदस्य नहीं रहा है।

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