AI ने भारत को दिया बड़ा चांस

नवभारत टाइम्स

वर्ष 2025 भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का वर्ष रहा। इस क्षेत्र में भारी निवेश हुआ और बाजार का विस्तार हुआ। सरकार और निजी कंपनियां AI के विकास पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। भारत का लक्ष्य अपना लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) विकसित करना है। यह AI क्रांति भारत के लिए एक बड़ा अवसर है। भविष्य में AI बाजार और बढ़ेगा।

2025 ais golden year for india on the path to becoming a superpower
भारतीय टेक इतिहास में 2025 को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का साल माना जा रहा है। केंद्र सरकार ने पिछले साल India AI मिशन की शुरुआत की थी, जिसमें अगले 5 सालों में 10 हजार करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य रखा गया था। अब, एक साल बाद ही, 2025 में इस निवेश को दोगुना करने की बात हो रही है। इस पैसे से देश की यूनिवर्सिटीज, स्टार्टअप्स और अन्य संस्थानों को AI के लिए जरूरी हार्डवेयर, जैसे बड़े-बड़े GPU और अन्य सुविधाएं दी जा रही हैं। AICTE ने भी 2025 को शिक्षा में AI का साल घोषित किया है। इन सब कदमों का मकसद सिर्फ AI क्रांति के लिए तैयार करना ही नहीं, बल्कि देश का अपना लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) भी तैयार करना है, ठीक वैसे ही जैसे OpenAI का ChatGPT और Google का Gemini हैं। अगर यह लक्ष्य हासिल हो गया, तो भारत AI की दुनिया में एक बड़ी महाशक्ति बन सकता है।

2025 में इन प्रयासों के नतीजे भी दिखने लगे। देश में AI का बाजार 2024 में 9.51 अरब डॉलर था, जो 2025 में बढ़कर 13.03 अरब डॉलर हो गया। यह अनुमान है कि 2032 तक यह बाजार 130.63 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है, यानी आज के मुकाबले 10 गुना ज्यादा! Amazon और Microsoft जैसी बड़ी कंपनियों ने भी भारत के AI बाजार में अरबों डॉलर का निवेश किया है। Google ने AdaniConneX और Airtel के साथ मिलकर विशाखापत्तनम में भारत का पहला बड़ा AI हब बनाना शुरू कर दिया है।
2025 में AI टूल्स आम जनता के लिए लगभग मुफ्त में उपलब्ध होने लगे। Airtel ने अपने ग्राहकों को Perplexity AI का सब्सक्रिप्शन मुफ्त में दिया, तो वहीं Reliance Jio ने अपने ग्राहकों को Google Gemini इस्तेमाल करने की पूरी आजादी दी। साल के अंत तक शायद ही कोई ऐसा गैजेट बचा हो जो AI से लैस न हो। सरकार हो, कोई संस्थान हो, बड़ी कंपनी हो या आम ग्राहक, हर कोई 2025 के भारतीय टेक जगत में AI का जलवा देख सकता है।

लेकिन सच तो यह है कि भारत में AI का यह अभी शुरुआती दौर है। देश की बड़ी टेक कंपनियां पैसा तो लगा रही हैं, लेकिन हमें यह समझना होगा कि अभी AI की दुनिया में हमारी भूमिका वैसी ही है, जैसी 2000 की शुरुआत में इंटरनेट और डॉट-कॉम के दौर में थी। हम एक बड़े बाजार की तरह हैं, जहाँ काफी संसाधन कम दाम पर मिल सकते हैं।

लगभग दो दशक पहले, देश और उसके संस्थानों के पास यह मौका था कि वे इनोवेशन और खास प्रोडक्ट्स के जरिए पूरी दुनिया पर अपनी छाप छोड़ सकें। लेकिन आगे निकलने का वह मौका हाथ से निकल गया। इसका नतीजा यह हुआ कि भारत एक बड़ा टेक मार्केट तो बन गया, लेकिन इस मार्केट में उसके अपने प्रोडक्ट्स बहुत कम हैं।

यही खतरा AI के क्षेत्र में भी मंडरा रहा है। भारत में निवेश तो हो रहा है, लेकिन हमारे पास अभी अपना कोई बहुत बड़ा और खास AI प्रोडक्ट नहीं है। ऐसा नहीं है कि हममें अपना AI इकोसिस्टम और टूल्स बनाने की क्षमता नहीं है। सरकार 'BharatGen' नाम के एक लार्ज लैंग्वेज मॉडल पर काम कर रही है। इसे भारतीय संस्कृति और सभ्यता को ध्यान में रखकर बनाया जा रहा है और यह 22 भारतीय भाषाओं में काम करेगा। इसी तरह, 'Krutrim' और 'Sarvam-M' जैसे LLM भी भारतीय कंपनियां बना चुकी हैं। लेकिन ये अभी Google, Microsoft या Meta जैसे दिग्गजों के प्रोडक्ट्स को टक्कर नहीं दे सकते।

दुनिया के दिग्गजों से मुकाबला करने में अभी समय लगेगा। इसके लिए दूरदर्शिता, सही निवेश और मजबूत नेतृत्व की जरूरत होगी। फटाफट पैसा कमाने की दौड़ में हमारा देश पहले भी टेक के क्षेत्र में लंबा नुकसान झेल चुका है। हमें यह ध्यान रखना होगा कि वैसी गलती अब दोबारा न हो। इस मामले में सरकार के AI सिखाने और पढ़ाने के कार्यक्रम, जैसे ‘Yuva AI for All’, बहुत महत्वपूर्ण हैं। भारत को अपना AI चाहिए, जो उसकी खास जरूरतों को पूरा करे और जिसे किसी भारतीय ने बनाया हो।

इसमें कोई शक नहीं कि 2025 भारत में AI का साल था, लेकिन यह अभी सिर्फ पहला कदम है। 2026 में देश को AI बाजार का बादशाह बनने की लंबी यात्रा के पहले कदम उठाने होंगे। यह राह आसान नहीं है और इसमें कई चुनौतियां हैं, लेकिन सही फैसले और धैर्य से हम अपने लक्ष्य को हासिल कर सकते हैं। अगर ऐसा हुआ, तो AI की अगली पीढ़ी 'BharatGen' की होगी।

2025 को भारतीय टेक्नोलॉजी के इतिहास में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के साल के तौर पर याद किया जाएगा। केंद्र सरकार ने पिछले साल 'India AI मिशन' की शुरुआत की थी, जिसका लक्ष्य अगले पांच सालों में 10,000 करोड़ रुपये का निवेश करना था। अब, मिशन शुरू होने के एक साल बाद ही, 2025 में इस निवेश को दोगुना करने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। इस बढ़ी हुई राशि का इस्तेमाल देश की यूनिवर्सिटीज, स्टार्टअप इकोसिस्टम और अन्य संस्थानों को AI के लिए आवश्यक हार्डवेयर, जैसे कि बड़े-बड़े ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (GPU) और अन्य सुविधाएं प्रदान करने के लिए किया जाएगा। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) ने भी 2025 को 'शिक्षा में AI का साल' घोषित किया है। इन पहलों का मुख्य उद्देश्य न केवल देश को AI क्रांति के लिए तैयार करना है, बल्कि भारत का अपना लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) विकसित करना भी है, जो OpenAI के ChatGPT और Google के Gemini जैसे मॉडलों के समकक्ष हो। यदि भारत इस लक्ष्य को प्राप्त कर लेता है, तो वह AI की दुनिया में एक प्रमुख शक्ति के रूप में उभर सकता है।

2025 में इन सरकारी और निजी प्रयासों के सकारात्मक परिणाम दिखने लगे। देश का AI बाजार, जो 2024 में 9.51 अरब डॉलर का था, 2025 में बढ़कर 13.03 अरब डॉलर तक पहुंच गया। यह अनुमान लगाया जा रहा है कि 2032 तक यह बाजार 130.63 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है, जो वर्तमान आकार से दस गुना अधिक होगा। Amazon और Microsoft जैसी वैश्विक टेक दिग्गज कंपनियों ने भी भारतीय AI बाजार में अरबों डॉलर का निवेश किया है। Google ने AdaniConneX और Airtel के साथ मिलकर विशाखापत्तनम में भारत के पहले बड़े AI हब का निर्माण शुरू कर दिया है।

2025 में AI टूल्स आम जनता के लिए लगभग मुफ्त या बहुत कम कीमत पर उपलब्ध होने लगे। Airtel ने अपने ग्राहकों को Perplexity AI की सेवा मुफ्त में प्रदान की, जबकि Reliance Jio ने अपने सब्सक्राइबर्स को Google Gemini का उपयोग करने की खुली छूट दी। साल के अंत तक, बाजार में शायद ही कोई ऐसा गैजेट बचा हो जो AI से लैस न हो। चाहे सरकार की नजर से देखें, संस्थानों की, बड़ी कंपनियों की या आम उपभोक्ताओं की, 2025 के भारतीय टेक परिदृश्य में AI का बोलबाला साफ दिखाई दे रहा था।

हालांकि, यह समझना महत्वपूर्ण है कि भारत में AI का यह अभी प्रारंभिक चरण है। देश की बड़ी टेक कंपनियां AI में भारी निवेश कर रही हैं, लेकिन वर्तमान में AI की दुनिया में हमारी भूमिका एक बड़े बाजार की है, जहाँ संसाधन आसानी से और कम लागत पर उपलब्ध हैं। यह स्थिति 2000 के दशक की शुरुआत में इंटरनेट और डॉट-कॉम बूम के दौरान भारत की भूमिका के समान है।

लगभग दो दशक पहले, भारत और उसके संस्थानों के पास नवाचार (innovation) और विशिष्ट उत्पादों के माध्यम से वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाने का एक सुनहरा अवसर था। वह अवसर चूक गया। परिणामस्वरूप, भारत आज एक विशाल टेक बाजार तो है, लेकिन इस बाजार में उसके अपने उत्पादों की हिस्सेदारी बहुत कम है।

यही जोखिम AI के क्षेत्र में भी मौजूद है। भारत में AI में निवेश तो बढ़ रहा है, लेकिन हमारे पास अभी तक कोई ऐसा बड़ा और प्रभावशाली AI उत्पाद नहीं है जो वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सके। ऐसा नहीं है कि भारत में अपना AI इकोसिस्टम और टूल्स विकसित करने की क्षमता नहीं है। सरकार 'BharatGen' नामक एक लार्ज लैंग्वेज मॉडल पर काम कर रही है, जिसे भारतीय संस्कृति, सभ्यता और मूल्यों को ध्यान में रखकर विकसित किया जा रहा है। यह मॉडल 22 भारतीय भाषाओं में काम करेगा। इसके अलावा, 'Krutrim' और 'Sarvam-M' जैसे LLM भी भारतीय कंपनियों द्वारा विकसित किए जा चुके हैं। हालांकि, ये मॉडल अभी Google, Microsoft या Meta जैसे वैश्विक दिग्गजों के उत्पादों को कड़ी टक्कर देने की स्थिति में नहीं हैं।

वैश्विक AI दिग्गजों के साथ प्रतिस्पर्धा करने में अभी समय लगेगा। इसके लिए दूरदर्शिता, पर्याप्त निवेश और सुविचारित नेतृत्व की आवश्यकता होगी। केवल त्वरित लाभ कमाने की दौड़ में, भारत ने पहले भी टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में लंबा नुकसान उठाया है। यह महत्वपूर्ण है कि वैसी गलती AI के क्षेत्र में दोहराई न जाए। इस संदर्भ में, सरकार द्वारा चलाए जा रहे 'Yuva AI for All' जैसे AI शिक्षा और प्रशिक्षण कार्यक्रम अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। भारत को अपने स्वयं के AI की आवश्यकता है, जो देश की विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा करे और जिसे किसी भारतीय द्वारा विकसित किया गया हो।

इसमें कोई संदेह नहीं है कि 2025 भारत में AI का साल था, लेकिन यह अभी केवल पहला कदम है। 2026 में, देश को AI बाजार में एक प्रमुख खिलाड़ी बनने की अपनी लंबी यात्रा के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाने होंगे। यह राह चुनौतियों से भरी है, लेकिन सही निर्णय लेने और धैर्य बनाए रखने से लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। यदि ऐसा होता है, तो AI की अगली पीढ़ी वास्तव में 'BharatGen' की होगी।