Franz Kafka Towards Greatness After Death Max Brods Unforgettable Decision
मौत के बाद महानता
नवभारत टाइम्स•
फ्रांज काफ्का ने अपनी मृत्यु से पहले अपनी सारी रचनाएं जलाने को कहा था। उनके मित्र मैक्स ब्रॉड ने उनकी इच्छा का पालन नहीं किया। उन्होंने काफ्का की अधूरी पांडुलिपियों को संपादित कर प्रकाशित किया। इससे काफ्का को विश्व साहित्य में पहचान मिली। वे 20वीं सदी के महान लेखकों में गिने जाने लगे।
फ्रांज काफ्का , 20वीं सदी के एक महान लेखक, जिनकी रचनाएं आज दुनिया भर में पढ़ी जाती हैं, ने अपनी मृत्यु से पहले अपने मित्र मैक्स ब्रॉड से अपनी सारी पांडुलिपियां जलाने का आग्रह किया था। प्राग में जन्मे बीमा अधिकारी काफ्का को अपनी रचनाएं अधूरी और अप्रकाशित योग्य लगती थीं। लेकिन उनके मित्र मैक्स ब्रॉड ने उनकी इच्छा के विरुद्ध जाकर इन पांडुलिपियों को संपादित कर प्रकाशित किया, जिससे काफ्का को वह पहचान मिली जिसके वे अपने जीवनकाल में हकदार नहीं थे।
काफ्का का जीवन एक पहेली जैसा था। वे खुद अपनी रचनाओं को लेकर हमेशा संशय में रहते थे। उन्हें लगता था कि जो कुछ भी उन्होंने लिखा है, वह अधूरा है और पाठकों के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं है। तपेदिक जैसी गंभीर बीमारी से जूझते हुए, उन्होंने अपने सबसे करीबी दोस्त, इस्राइली लेखक, संगीतकार और पत्रकार मैक्स ब्रॉड से एक खास बात कही। उन्होंने कहा, "मेरी मौत के बाद मेरी सारी पांडुलिपियां जला देना। जो कुछ लिखा है, वह प्रकाशित होने योग्य नहीं है।" यह बात उन्होंने सिर्फ एक बार नहीं, बल्कि कई बार कही थी, और लिखित रूप में भी दोहराई थी।उनके पास 'द ट्रायल', 'द कैसल', 'अमेरिका' जैसे बड़े उपन्यास थे, जो पूरे नहीं हुए थे। इसके अलावा, उनकी कई कहानियां और डायरी के अंश भी थे। 1924 में जब काफ्का का निधन हुआ, तो मैक्स ब्रॉड एक बड़ी दुविधा में पड़ गए। एक तरफ उनका दोस्त था, जिसने उनसे अपनी रचनाएं नष्ट करने को कहा था। दूसरी तरफ, साहित्य के प्रति उनका अपना कर्तव्य था। वे जानते थे कि काफ्का की रचनाएं कितनी महत्वपूर्ण हो सकती हैं।
इस मुश्किल घड़ी में, मैक्स ब्रॉड ने अपने दोस्त की इच्छा को दरकिनार करने का फैसला किया। उन्होंने काफ्का की पांडुलिपियों को जलाया नहीं, बल्कि उन्हें ध्यान से पढ़ा, संपादित किया और फिर दुनिया के सामने पेश किया। धीरे-धीरे, काफ्का का अनोखा लेखन लोगों तक पहुंचा। जिन लेखक को अपने जीवन में बहुत कम लोग जानते थे, वे 20वीं सदी के सबसे बड़े लेखकों में गिने जाने लगे। यह सब मैक्स ब्रॉड की वजह से संभव हुआ, जिन्होंने काफ्का की कला को बचाए रखा।