नए वर्ष की सुंदरता अपने पवित्र भाव में तलाश कर देखिए

Contributed byस्वामी सुखबोधानंद|नवभारत टाइम्स

नया वर्ष तभी सार्थक होगा जब हम अपने भीतर प्रेम, आनंद और सौंदर्य की ऊर्जा महसूस करेंगे। एक सच्चा गुरु अपनी उपस्थिति से यह भाव संचारित करता है। जीवन स्वयं एक महान गुरु है। हम भी तितली की तरह रूपांतरित हो सकते हैं। एक बढ़ई की तरह प्रेम और आनंद से काम करने पर अद्भुत कृतियां बनती हैं।

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नया साल तभी सार्थक होगा जब हम अपने भीतर प्रेम, आनंद और सौंदर्य की ऊर्जा को महसूस करेंगे। ये भावनाएं हमें ईश्वर से जोड़ती हैं और जीवन को अर्थपूर्ण बनाती हैं। एक सच्चा गुरु अपनी उपस्थिति से इन तरंगों का संचार करता है, जैसा कि श्रीकृष्ण ने अर्जुन को अपनी उपस्थिति से ज्ञान दिया, न कि केवल शब्दों से। जीवन स्वयं एक महान गुरु है, और हमें इसे सम्मान और प्रेम से जीना चाहिए, यह समझते हुए कि हम भी तितली की तरह रूपांतरित हो सकते हैं। एक चीनी बढ़ई की तरह, जो पेड़ से गहरे प्रेम और आनंद के साथ जुड़कर अद्भुत कलाकृतियाँ बनाता था, हम भी दिव्यता की अनुभूति के साथ जीवन जी सकते हैं, जिससे नया साल अविश्वसनीय सुंदरता और गहराई से भर जाएगा।

प्रेम, आनंद और सौंदर्य की लहरें जहाँ भी उठती हैं, वहाँ पवित्रता की कमी नहीं होती। यही भावनाएँ हमें ईश्वर से जुड़ने में मदद करती हैं। इसलिए, यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि नया साल तभी जीवंत और अर्थपूर्ण बनेगा जब हम अपने भीतर इन भावनाओं की ऊर्जा को प्रवाहित होने देंगे।
एक सच्चा गुरु या सद्गुरु केवल शब्दों से नहीं, बल्कि अपनी उपस्थिति मात्र से इन सकारात्मक तरंगों का संचार करते हैं। इसका एक बेहतरीन उदाहरण श्रीकृष्ण का अर्जुन को दिया गया ज्ञान है। श्रीकृष्ण ने अर्जुन को शब्दों से अधिक अपनी उपस्थिति के माध्यम से ज्ञान दिया। यदि वे कुरुक्षेत्र के मैदान में केवल शब्दों से ही अर्जुन को समझाते, तो इसमें घंटों लग जाते। हो सकता है कि समझाते-समझाते बहुत लंबा समय बीत जाता। उस समय, यह दो हृदयों के बीच का संवाद था, जो शब्दों और समय की सीमाओं से परे था। यह संवाद श्रीकृष्ण की उपस्थिति से निकली ऊर्जा तरंगों से संभव हुआ था। एक सपना शायद केवल दो मिनट का होता है, लेकिन जागने के बाद उसे बताने में एक घंटा लग सकता है। इसी तरह, गुरु की उपस्थिति का प्रभाव शब्दों से कहीं अधिक गहरा होता है।

किसी गुरु के पास जाने से पहले, अपने मन को शांत करना बहुत ज़रूरी है। अपने मन को प्रेम, आनंद और सौंदर्य के भावों से भरने दें। जीवन स्वयं सबसे बड़ा गुरु और शास्त्र है। इसलिए, हमें जीवन के साथ सम्मान और प्रेम का व्यवहार करना चाहिए। हम उस कैटरपिलर की तरह हैं, जिसे यह पता नहीं होता कि वह एक सुंदर तितली बन सकती है। इसी तरह, हमें भी यह एहसास नहीं होता कि हम भी बुद्ध (ज्ञानी) बन सकते हैं।

चीन के एक ऐसे ही कुशल बढ़ई की कहानी प्रेरणादायक है। उसने अपनी कला से अद्भुत नमूने बनाए थे। जब उससे उसकी सफलता का रहस्य पूछा गया, तो उसने कहा, ‘मैं किसी पेड़ के पास गहरे प्रेम और आनंद के साथ जाता हूं, उससे पूछता हूं कि क्या वह कटने के लिए तैयार है। जब मेरी अंतरात्मा किसी विशेष पेड़ के लिए ‘हां’ कहती है, तभी मैं हृदय में प्रार्थना लिए उस पेड़ को काटता हूं।’ इसी पवित्र भाव और गहरे जुड़ाव से वह अद्भुत कृतियाँ रच सका।

क्या हम भी अपने जीवन को दिव्यता की अनुभूति के साथ जी सकते हैं? यदि हम ऐसा करने में सफल हो पाते हैं, तो हमारे लिए आने वाला नया साल ऐसी सुंदरता और गहराई से भर जाएगा, जिसे शब्दों में व्यक्त करना संभव नहीं होगा। यह एक ऐसी अवस्था है जहाँ हम जीवन के हर पल को एक उत्सव की तरह जी सकते हैं।