Develop Libraries As Knowledge Centers Education Department Directives Emphasis On Digital Content And Online Systems
'पुस्तकालय को ज्ञान केंद्र के रूप में विकसित करें'
नवभारत टाइम्स•
लखनऊ में शिक्षा निदेशालय में एक समीक्षा बैठक हुई। अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने पुस्तकालयों को ज्ञान केंद्र बनाने का निर्देश दिया। बैठक में पुस्तकालयाध्यक्ष और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। प्रदेश के सार्वजनिक पुस्तकालयों को आम जनता के लिए उपयोगी बनाने पर चर्चा हुई। सफल प्रयोगों को अपनाने और डिजिटल कंटेंट बढ़ाने के निर्देश दिए गए।
लखनऊ: शिक्षा निदेशालय के शिविर कार्यालय, पार्क रोड में बुधवार को एक अहम बैठक हुई। इस बैठक की अध्यक्षता अपर मुख्य सचिव, माध्यमिक और बेसिक शिक्षा विभाग पार्थ सारथी सेन शर्मा ने की। उन्होंने कहा कि पुस्तकालयों को सिर्फ किताबों का गोदाम नहीं, बल्कि ज्ञान का केंद्र बनाना बहुत ज़रूरी है। इस बैठक में केंद्रीय राज्य पुस्तकालय और प्रदेश के सभी जिलों के पुस्तकालयाध्यक्षों ने हिस्सा लिया। साथ ही, विशेष सचिव उमेश चंद्र, शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) महेंद्र देव, अपर शिक्षा निदेशक मनोज कुमार द्विवेदी और विशेष कार्याधिकारी (पुस्तकालय) सांत्वना तिवारी जैसे कई बड़े अधिकारी भी मौजूद रहे।
बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि प्रदेश के सार्वजनिक पुस्तकालयों को आम लोगों के लिए और भी ज़्यादा फायदेमंद और असरदार कैसे बनाया जाए। कुछ जिलों के पुस्तकालयों ने अपने नए और कामयाब कामों को पीपीटी (प्रेजेंटेशन) के ज़रिए दिखाया। अपर मुख्य सचिव ने इन सफल तरीकों को पूरे प्रदेश के सभी पुस्तकालयों में अपनाने के निर्देश दिए। उन्होंने यह भी कहा कि डिजिटल सामग्री को बढ़ाया जाए, राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय (National e-library) को लागू किया जाए और किताबों के ऑनलाइन इशू-रिटर्न सिस्टम (online issue-return system) को शुरू किया जाए।पार्थ सारथी सेन शर्मा ने जोर देकर कहा कि पुस्तकालयों को सिर्फ किताबों का भंडार नहीं समझना चाहिए। उन्हें ज्ञान के ऐसे केंद्र के रूप में विकसित करना चाहिए जहाँ लोग नई चीजें सीख सकें और जानकारी हासिल कर सकें। उन्होंने कहा, "पुस्तकालयों को केवल किताबों का भंडार न मानकर ज्ञान केंद्र के रूप में विकसित करना जरूरी है।"
कुछ जिलों के पुस्तकालयों ने अपने अनूठे और सफल प्रयोगों को प्रेजेंटेशन के माध्यम से पेश किया। इन प्रयोगों में नई तकनीक का इस्तेमाल और लोगों को जोड़ने के तरीके शामिल थे। अपर मुख्य सचिव ने इन नवाचारों (innovations) की सराहना की और कहा कि इन्हें पूरे प्रदेश में लागू किया जाना चाहिए ताकि सभी पुस्तकालय बेहतर बन सकें।
डिजिटल सामग्री को बढ़ाने पर भी खास ध्यान दिया गया। इसका मतलब है कि पुस्तकालयों में ई-बुक्स (e-books) और ऑनलाइन संसाधनों की उपलब्धता बढ़ाई जाएगी। राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय को लागू करने से देश भर की जानकारी एक जगह उपलब्ध हो सकेगी। साथ ही, किताबों के ऑनलाइन इशू-रिटर्न सिस्टम से लोगों को किताबें लेने और वापस करने में आसानी होगी, जिससे समय बचेगा और प्रक्रिया सरल हो जाएगी।