Fedor Dostoevsky Learned The Precious Value Of Life From A Near death Experience
जीवन का मोल
नवभारत टाइम्स•
महान रूसी साहित्यकार फ्योदोर दोस्तोएव्स्की का जीवन संघर्षों से भरा रहा। उन्हें मृत्युदंड की सजा सुनाई गई थी, लेकिन अंतिम क्षणों में यह सजा बदल दी गई। मौत को करीब से देखने के इस अनुभव ने उनके जीवन को बदल दिया। साइबेरिया के निर्वासन के दौरान उनका दार्शनिक दृष्टिकोण परिपक्व हुआ। उनकी प्रसिद्ध कृतियों में क्राइम एंड पनिशमेंट शामिल है।
19वीं सदी के महान रूसी साहित्यकार फ्योदोर दोस्तोएव्स्की का जीवन मौत के करीब से देखने के एक भयानक अनुभव से गुजरा, जिसने उन्हें पूरी तरह बदल दिया। मॉस्को में जन्मे दोस्तोएव्स्की को जार-विरोधी गतिविधियों के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उन्हें मृत्युदंड की सजा सुनाई गई, लेकिन फांसी से ठीक पहले यह घोषणा की गई कि यह एक नकली फांसी थी और उनकी सजा को साइबेरिया में कठोर श्रम और निर्वासन में बदल दिया गया है। इस अनुभव ने उनके जीवन के प्रति दृष्टिकोण को गहराई से प्रभावित किया और उनकी प्रसिद्ध कृतियों जैसे 'Crime and Punishment', 'The Idiot' और 'The Brothers Karamazov' को जन्म दिया।
दोस्तोएव्स्की का बचपन मॉस्को के मारीइंस्की अस्पताल में बीता, जहाँ उनके पिता डॉक्टर थे। उनका पूरा जीवन मुश्किलों से भरा रहा। 1849 में, उन्हें ज़ार के खिलाफ़ काम करने के आरोप में पकड़ लिया गया। कई महीनों तक जेल में रहने के बाद, उन्हें मौत की सज़ा सुनाई गई। एक ठंडी, बर्फीली सुबह, उन्हें दूसरे कैदियों के साथ फाँसी पर चढ़ाने के लिए ले जाया गया। जैसे ही गोलियाँ चलने वाली थीं, तभी ज़ार का एक दूत वहाँ पहुँचा और उसने सबको चौंका दिया। उसने ऐलान किया कि यह फाँसी सिर्फ़ दिखावा थी। उनकी सज़ा को बदलकर साइबेरिया में कड़ी मेहनत और निर्वासित जीवन जीने के लिए भेज दिया गया।मौत को इतनी करीब से देखने का यह अनुभव दोस्तोएव्स्की के लिए एक बड़ा झटका था। उन्होंने अपने लिखे पत्रों में बताया कि उस दिन के बाद से उन्हें जीवन का हर पल बहुत कीमती लगने लगा। साइबेरिया की भयानक यातनाओं और अकेलेपन के बीच ही उनके जीवन को देखने का नज़रिया और गहरा हुआ। इसी अनुभव ने उन्हें आगे चलकर 'Crime and Punishment', 'The Idiot' और 'The Brothers Karamazov' जैसी कालजयी रचनाएँ लिखने की प्रेरणा दी। यह घटना हमें सिखाती है कि कभी-कभी जीवन हमें तोड़ने के लिए नहीं, बल्कि हमें जीना सिखाने के लिए ही झकझोरता है।