Big Changes In Transfer Pricing Reporting With Cbdts Draft Rules Effective From April 1 2026
lead ke niche_ड्राफ्ट नियमों ने ट्रांसफर प्राइसिंग रिपोर्टिंग में बड़ा बदलाव
नवभारत टाइम्स•
आयकर नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ डायरेक्ट टैक्सेज़ ने नए नियमों और फॉर्म्स का मसौदा जारी किया है। यह 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा। आम जनता से सुझाव मांगे गए हैं। भाषा को सरल बनाने और अनुपालन बोझ कम करने पर जोर है। डिजिटल रुपये को खास भुगतानों के लिए मान्यता मिलेगी।
नई दिल्ली: सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ डायरेक्ट टैक्सेज़ (CBDT) ने 1 अप्रैल, 2026 से लागू होने वाले इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 के लिए नियमों और फॉर्म्स का ड्राफ्ट जारी किया है। विभाग ने यह कदम पब्लिक कंसल्टेशन यानी आम जनता से सुझाव लेने के लिए उठाया है। इस ड्राफ्ट को CBDT की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया गया है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसमें अपनी राय दे सकें। विभाग ने चार मुख्य बातों पर सुझाव मांगे हैं: भाषा को आसान बनाना, मुकदमों को कम करना, लोगों पर अनुपालन का बोझ घटाना और पुराने या बेकार हो चुके नियमों व फॉर्म्स को हटाना।
CBDT ने एक बयान में बताया कि प्रस्तावित आयकर नियम, 2026 और इससे जुड़े फॉर्म्स को अंतिम रूप देने से पहले लोगों के सुझावों के लिए जारी किया गया है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि सभी की भागीदारी हो। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने परामर्श प्रक्रिया के तहत हितधारकों से चार खास श्रेणियों में सुझाव मांगे हैं। इनमें सबसे पहले है नियमों की भाषा को सरल बनाना ताकि आम आदमी भी इसे आसानी से समझ सके। दूसरा, मुकदमों की संख्या को कम करना, जिससे अदालतों पर बोझ कम हो और लोगों को राहत मिले। तीसरा, करदाताओं पर अनुपालन का बोझ कम करना, यानी टैक्स से जुड़े नियमों का पालन करना आसान बनाना। और चौथा, ऐसे नियमों और फॉर्म्स की पहचान करना जो अब प्रासंगिक नहीं हैं या पुराने हो चुके हैं।नियमों में कुछ बड़े बदलावों का प्रस्ताव भी है। जैसे, फॉरेन टैक्स क्रेडिट (FTC) क्लेम करने के लिए अब अकाउंटेंट से सर्टिफाइड फाइलिंग की जरूरत होगी। इसका मकसद गलत क्लेम को कम करना है। इसके अलावा, खास पेमेंट्स के लिए डिजिटल रुपये को भी मान्यता देने का प्रस्ताव है। साथ ही, ऑडिट रिपोर्ट, स्टेटमेंट और TDS सर्टिफिकेशन से जुड़े फॉर्म्स को एक साथ मिलाकर एक ही फॉर्म में लाने की भी योजना है। इससे काम आसान होगा।
विभाग ने कहा है कि 'हितधारकों को इन मसौदों का अध्ययन कर सुझाव देने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। अंतिम अधिसूचना से पूर्व इन सभी सुझावों को संकलित कर उन पर समीक्षा के लिए विचार किया जाएगा।' यानी, जो भी सुझाव आएंगे, उन्हें इकट्ठा किया जाएगा और अंतिम नियमों को बनाने से पहले उन पर ध्यान दिया जाएगा।
सुझाव देने की सुविधा के लिए 'ई-फाइलिंग' पोर्टल पर एक खास लिंक जारी किया गया है। यह लिंक 4 फरवरी, 2026 से सक्रिय है। जो लोग सुझाव देना चाहते हैं, वे इस लिंक पर जाकर अपने नाम और मोबाइल नंबर के जरिए ओटीपी वेरिफिकेशन के बाद अपने सुझाव साझा कर सकते हैं। विभाग ने यह भी साफ किया है कि सुझाव देते समय, जिस नियम, उप-नियम या फॉर्म नंबर पर आप सुझाव दे रहे हैं, उसका स्पष्ट रूप से उल्लेख करना जरूरी है। इससे विभाग को आपके सुझाव को समझने और उस पर कार्रवाई करने में आसानी होगी। यह पहल टैक्स सिस्टम को और बेहतर और आम आदमी के लिए सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।