भारत-US डील: किन सेक्टरों में लगाएं दांव?

नवभारत टाइम्स

भारत और अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील ने भारतीय शेयर बाजार में नई जान फूंकी है। इस डील से कुछ भारतीय उत्पादों पर टैरिफ घटाया गया है, जिससे निर्यात बढ़ने की उम्मीद है। यह डील उन कंपनियों के लिए फायदेमंद साबित होगी जिनकी बैलेंस शीट मजबूत है और जो विस्तार करने की क्षमता रखती हैं।

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भारत और अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील ने भारतीय शेयर बाजार में नई जान फूंकी है। 3 फरवरी को बाजार में जबरदस्त तेजी देखी गई, जिसमें सेंसेक्स 3,657 अंक और निफ्टी 1,220 अंक तक उछले। इस डील से रुपये में मजबूती आई है और विदेशी निवेशकों (FII) की वापसी की उम्मीदें भी बढ़ी हैं। इस समझौते के तहत अमेरिका ने कुछ भारतीय उत्पादों पर लगने वाले टैरिफ को 50% से घटाकर 18% कर दिया है। इससे उन भारतीय उद्योगों को बड़ी राहत मिली है जो काफी समय से मुश्किलों का सामना कर रहे थे। अब निवेशक यह जानने को उत्सुक हैं कि इस डील से असली कमाई कहां हो सकती है और उन्हें किस दिशा में निवेश करना चाहिए।

यह ट्रेड डील इसलिए अहम है क्योंकि टैरिफ घटने का सीधा मतलब है कि भारतीय कंपनियों के लिए अमेरिका में अपने उत्पाद बेचना अब सस्ता और ज्यादा प्रतिस्पर्धी हो जाएगा। इससे भारत से होने वाले निर्यात में बढ़ोतरी हो सकती है। कंपनियों की कमाई में सुधार की उम्मीद है और इससे विदेशी निवेशकों का भरोसा भी मजबूत होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस डील का सबसे ज्यादा फायदा उन्हीं कंपनियों को मिलेगा जिनकी आर्थिक स्थिति मजबूत है, जिनका अमेरिका में पहले से ही अच्छा कारोबार है और जो बड़े पैमाने पर अपने व्यापार का विस्तार कर सकती हैं।
MOFSL के चेयरमैन रामदेव अग्रवाल का कहना है कि अब भारतीय बाजार का ‘2.0 दौर’ शुरू हो सकता है। उनका मानना है कि विदेशी निवेशकों (FIIs) का भारत को देखने का नजरिया बदल सकता है। जाने-माने निवेशक और केडिया सिक्योरिटीज के MD विजय केडिया भी इसे निवेश का एक बेहतरीन मौका मानते हैं। वह कहते हैं कि दूसरे देशों की तुलना में अब भारत FIIs के लिए सस्ता हो गया है।

इस डील से भारतीय कंपनियों के लिए अमेरिकी बाजार में सामान बेचना आसान हो जाएगा। पहले जो टैक्स ज्यादा लगता था, अब वह कम हो गया है। इसका मतलब है कि भारतीय कंपनियां अपने उत्पादों को कम कीमत पर बेच सकेंगी और ज्यादा ग्राहक आकर्षित कर सकेंगी। इससे भारतीय कंपनियों के मुनाफे में वृद्धि होने की संभावना है। जब कंपनियां अच्छा मुनाफा कमाती हैं, तो उनके शेयर की कीमत भी बढ़ती है, जिससे निवेशकों को फायदा होता है।

विदेशी निवेशक, जिन्हें FIIs कहा जाता है, वे भारत में पैसा लगाते हैं। जब उन्हें लगता है कि भारत में निवेश करना फायदेमंद है, तो वे यहां पैसा लगाते हैं। इस ट्रेड डील से उन्हें भारत में निवेश करने का एक और अच्छा कारण मिला है। टैरिफ कम होने से भारतीय उत्पादों की मांग बढ़ेगी, जिससे भारतीय कंपनियों की कमाई बढ़ेगी और FIIs को भी अच्छा रिटर्न मिलेगा। इसलिए, FIIs की वापसी से बाजार में और तेजी आने की उम्मीद है।

यह डील उन छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए भी अच्छी खबर है जो अमेरिका को निर्यात करते हैं। टैरिफ में कटौती से उन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिलेगी। इससे न केवल इन उद्योगों को लाभ होगा, बल्कि देश में रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं। कुल मिलाकर, यह ट्रेड डील भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक कदम है और निवेशकों के लिए नए अवसर खोल सकती है।