पारंपरिक हस्तशिल्प का बढ़ रहा क्रेज

नवभारत टाइम्स

फरीदाबाद मेले में राजस्थान की मोलेला गांव की टेराकोटा कला लोगों को आकर्षित कर रही है। लक्ष्मी लाल कुमार इस पारंपरिक कला को बढ़ावा दे रहे हैं। उनके साथ जुड़ी महिलाएं मिट्टी के कलात्मक उत्पाद बनाकर आत्मनिर्भर बन रही हैं। यह पहल महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बना रही है और पारंपरिक कला को नई पहचान दिला रही है।

growing craze for traditional handicrafts molelas terracotta art making women self reliant
फरीदाबाद में लगे मेले में राजस्थान के मोलेला गांव से आए लक्ष्मी लाल कुमार अपनी अनोखी टेराकोटा कला से लोगों का दिल जीत रहे हैं। वे महिलाओं को घर बैठे रोजगार देकर आत्मनिर्भर बना रहे हैं और पारंपरिक कला को भी बढ़ावा दे रहे हैं।

लक्ष्मी लाल कुमार मेले में अपनी खास टेराकोटा कला और ग्रामीण पैनल का प्रदर्शन कर रहे हैं। यह कला राजस्थान के एक छोटे से गांव मोलेला की है। लक्ष्मी लाल कुमार सालों से इस पारंपरिक कला को बचाने और आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।
उनके स्टॉल पर मिट्टी के बने सुंदर बर्तन, टेराकोटा पैनल और दूसरी कलाकृतियां सजी हैं। ये सब चीजें लोगों को बहुत पसंद आ रही हैं।

लक्ष्मी लाल कुमार ने बताया कि उन्होंने अब तक 25 से ज्यादा महिलाओं को काम दिया है। उनके साथ जुड़ी महिलाएं घर पर ही मिट्टी से कलात्मक चीजें बनाती हैं। इससे वे खुद पैसे कमाकर आत्मनिर्भर बन रही हैं।

यह पहल बहुत अच्छी है। इससे न सिर्फ महिलाओं को आर्थिक मदद मिल रही है, बल्कि हमारी पुरानी कला को भी एक नई पहचान मिल रही है। यह कलाकृतियां लोगों को खूब लुभा रही हैं।