Retirement Party Singh Sahabs Farewell Ceremony After 40 Years Of Service
रिटायरी की पार्टी
नवभारत टाइम्स•
आजकल के युवा कलाकार जल्दी रिटायर हो रहे हैं। वहीं पुलिस विभाग के सिंह साहब 40 साल की नौकरी के बाद रिटायरमेंट पार्टी मना रहे हैं। सिंह साहब इसे खुशी का अवसर मानते हैं। घनश्याम बाबू का मानना है कि वे रिटायर होने वाली आखिरी पीढ़ी हैं क्योंकि भविष्य में नौकरी मिलना मुश्किल होगा।
आजकल रिटायरमेंट का ट्रेंड चल रहा है। बड़े-बड़े कलाकार भी अपनी उम्र से पहले ही काम छोड़ रहे हैं। लेकिन पुलिस विभाग के सिंह साहब को यह बात बिल्कुल पसंद नहीं आई। वह अपनी बाइक चमकाते हुए बोले, "क्या ज़माना आ गया है, अच्छा भला जमा जमाया धंधा छोड़कर आजकल के लड़का लोग रिटायरमेंट ले रहे हैं।" सिंह साहब खुद 40 साल की नौकरी के बाद रिटायर हो रहे थे और उन्होंने इसकी पार्टी भी रखी थी।
कम्युनिटी हॉल में हुई इस पार्टी में भोजपुरी गानों पर डांसर नाच रही थीं और उनके सामने बैठकर बुजुर्ग चाऊमीन का लुत्फ उठा रहे थे। गले में सोने की चेन पहने सिंह साहब मेहमानों का स्वागत प्रीमियम गुटखे से कर रहे थे। जब उन्हें गिफ्ट दिया गया तो उन्होंने कहा, "स्टेज पर दीजिएगा।" स्टेज पर जयमाला की तरह सजावट थी।अगले दिन सुबह जब लेखक सिंह साहब के घर के सामने से गुजरे तो वह धूप में ऊंघ रहे थे। लेखक ने पूछा, "अजीब सा लग रहा होगा?" इस पर सिंह साहब भड़क गए और बोले, "काहे अजीब लगेगा, अरे बिना ऊंचनीच के 40 साल नौकरी पूरी कर ली। यह तो खुशी का बात है।"
सिंह साहब के बगल में बैठे घनश्याम बाबू ने कहा, "ये लोग नहीं समझेगा, रिटायर होने वाली हम लोग आखिरी पीढ़ी हैं।" जब लेखक ने पूछा क्यों, तो घनश्याम बाबू ने तिरछी मुस्कान के साथ कहा, "नौकरी होगी तब न रिटायर होइएगा, उससे पहले ही कंपनी दरवाजा दिखा देगी।" लेखक को भी यह बात सही लगी।
यह बात सच है कि आजकल के युवा जल्दी रिटायरमेंट लेना चाहते हैं। चाहे वह बॉलीवुड के मशहूर गायक हों या स्टैंड-अप कॉमेडियन, सब अपनी उम्र से पहले ही काम छोड़ रहे हैं। लेकिन सिंह साहब जैसे लोग, जिन्होंने सालों तक मेहनत की और अब रिटायर हो रहे हैं, वे इस फैसले को खुशी का मौका मानते हैं।
सिंह साहब का मानना है कि 40 साल की नौकरी के बाद रिटायर होना एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने बिना किसी रुकावट के अपनी नौकरी पूरी की और अब वे इस पल का आनंद लेना चाहते हैं। उनकी पार्टी में नाच-गाना और मेहमानों का जमावड़ा इसी खुशी को जाहिर कर रहा था।
वहीं, घनश्याम बाबू की बात भी सोचने वाली है। उनका कहना है कि आज के समय में नौकरी मिलना ही मुश्किल है, तो रिटायरमेंट की बात तो दूर की है। कंपनियां कभी भी किसी को भी निकाल सकती हैं। इसलिए, जो लोग सालों तक नौकरी करके रिटायर हो रहे हैं, वे वाकई में आखिरी पीढ़ी के लोग हैं।
यह लेख हमें सोचने पर मजबूर करता है कि रिटायरमेंट का मतलब क्या है। क्या यह काम से छुट्टी लेना है या जीवन का एक नया अध्याय शुरू करना है? सिंह साहब के लिए यह खुशी का मौका है, जबकि घनश्याम बाबू के लिए यह एक चिंता का विषय है। यह दिखाता है कि हर किसी के लिए रिटायरमेंट का मतलब अलग-अलग हो सकता है।