बजट के बाद म्युनिसिपल बॉण्ड बनेंगे कमाई का नया जरिया?

नवभारत टाइम्स

बजट के बाद म्युनिसिपल बॉण्ड कमाई का नया जरिया बन सकते हैं। बड़े बॉण्ड जारी करने वाले नगर निगमों को इंसेंटिव मिलेगा। इससे आम निवेशक भी इन बॉण्ड्स में निवेश कर सकेंगे। म्युनिसिपल बॉण्ड से शहर के विकास के लिए पैसा जुटाया जाएगा। यह निवेशकों के लिए एक स्थिर रिटर्न का अवसर प्रदान करेगा।

बजट के बाद म्युनिसिपल बॉण्ड बनेंगे कमाई का नया जरिया?
(फोटो- नवभारत टाइम्स)

NBT रिपोर्ट : यूनियन बजट ने भारत के अभी-अभी उभर रहे म्युनिसिपल बॉण्ड मार्केट को नई रफ्तार दी है। बजट में प्रस्ताव दिया गया है कि अगर कोई नगर निगम 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का बॉण्ड जारी करता है, तो उसे 100 करोड़ रुपये का इंसेंटिव दिया जाएगा। 200 करोड़ तक के छोटे बॉण्ड के लिए AMRUT योजना के तहत मदद जारी रहेगी।

क्या हैं म्युनिसिपल बॉण्ड?


बजट के बाद म्युनिसिपल बॉण्ड बनेंगे कमाई का नया जरिया?

ET के मुताबिक, म्युनिसिपल बॉण्ड एक तरह के कर्ज के दस्तावेज होते हैं। इन्हें नगर निगम सड़कों, पानी की सप्लाई, सफाई और शहरों के विकास जैसे कामों के लिए पैसा जुटाने के लिए जारी करते हैं। निवेशकों को इसमें शहर की कमाई से मिलने वाला एक स्थिर रिटर्न मिलता है।

क्यों बढ़ रहा आकर्षण?

म्युनिसिपल बॉण्ड पर मिलने वाला मुनाफा ( yield ) बड़ी कंपनियों के अच्छे बॉण्ड के बराबर होता है और स्टेट डिवेपलमेंट लोन (SDLs) से थोड़ा ज्यादा होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि म्युनिसिपल बॉण्ड फिलहाल AAA रेटिंग वाले सरकारी या कॉरपोरेट बॉण्ड के मुकाबले 0.75% से 1% तक ज्यादा रिटर्न दे रहे हैं। 8% से 8.5% के रिटर्न पर भी इनकी काफी मांग है और ये बॉण्ड आते ही बिक जाते हैं।

क्या है चुनौती

ज्यादातर प्राइवेट प्लेसमेंट (चुनिंदा लोगों को बेचना) के जरिए लाए जाते हैं, जिसमें आम निवेशक हिस्सा नहीं ले पाते। कई म्युनिसिपल बॉण्ड 1 लाख या 10 लाख रुपये की शुरुआती कीमत (फेस वैल्यू) के साथ आते हैं, जो एक आम निवेशक के लिए बहुत ज्यादा है।

क्या है समस्या?

निवेशक इन्हें खरीदकर मैच्योरिटी तक अपने पास रखना पसंद करते हैं, क्योंकि इनका साइज छोटा होता है और इन्हें बाजार में तुरंत बेचना आसान नहीं होता।

क्या बदलेगी सूरत?

बजट में 100 करोड़ रुपये के प्रोत्साहन के ऐलान से यह स्थिति बदल सकती है। आने वाले समय में बाजार में इन बॉण्ड्स की खरीद-फरोख्त भी बढ़ेगी।