सरस मेला शुरू, 450 स्टॉल्स पर मिलेंगे अनूठे सामान

नवभारत टाइम्स

सेक्टर-29 लेजरवैली ग्राउंड में सरस आजीविका मेले का शुभारंभ हुआ है। यह मेला 26 फरवरी तक चलेगा। यहां 450 स्टॉल्स पर ग्रामीण महिलाएं अपने हस्तनिर्मित उत्पाद बेच रही हैं। मेले में नॉलेज एंड लर्निंग पवेलियन भी है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए विशेष सुविधाएं हैं। शाम को लोक नृत्य और संगीत की प्रस्तुतियां होंगी। प्रवेश निशुल्क है।

saras aajivika mela display of rural womens skills at 450 stalls runs till february 26
गुड़गांव के सेक्टर-29 स्थित लेजरवैली ग्राउंड में सोमवार को राष्ट्रीय स्तर के 'सरस आजीविका मेले' का शानदार आगाज़ हुआ। यह मेला 26 फरवरी तक चलेगा और इसका आयोजन ग्रामीण विकास मंत्रालय और राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान ने मिलकर किया है। इस मेले का मुख्य मकसद ग्रामीण स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और उनके हाथों से बने उत्पादों को एक बड़ा बाज़ार दिलाना है। मेले में 'नॉलेज एंड लर्निंग पवेलियन' एक खास आकर्षण है, जहाँ महिला उद्यमियों को सिर्फ़ सामान बेचना ही नहीं सिखाया जा रहा, बल्कि पैकेजिंग, ब्रांडिंग, सोशल मीडिया मार्केटिंग और लॉजिस्टिक्स जैसी ज़रूरी चीज़ों के बारे में भी बताया जा रहा है। ई-सरस पोर्टल के ज़रिए इन उत्पादों को ऑनलाइन भी बेचा जा रहा है। डीसी अजय कुमार ने लोगों से ज़्यादा से ज़्यादा संख्या में आकर ग्रामीण शिल्पकारों और स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं का हौसला बढ़ाने की अपील की है। यह मेला सिर्फ़ खरीदारी की जगह नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विविधता, कला और आत्मनिर्भर बनती ग्रामीण महिलाओं का एक जीता-जागता उत्सव है।

इस बार के 'सरस आजीविका मेले' में 'नॉलेज एंड लर्निंग पवेलियन' को खास तौर पर तैयार किया गया है। यहाँ महिला उद्यमी अपने उत्पादों को बेहतर बनाने के तरीके सीख रही हैं। उन्हें सिखाया जा रहा है कि कैसे अपने सामान की पैकेजिंग अच्छी करें, ब्रांडिंग कैसे करें ताकि लोग उसे पहचानें, सोशल मीडिया पर अपने उत्पादों का प्रचार कैसे करें और लॉजिस्टिक्स यानी सामान को ग्राहकों तक पहुँचाने का काम कैसे आसान बनाएँ। ग्रामीण विकास मंत्रालय की संयुक्त सचिव स्वाति शर्मा ने बताया कि ई-सरस पोर्टल के ज़रिए इन हस्तनिर्मित उत्पादों को ऑनलाइन बाज़ार से भी जोड़ा जा रहा है। इससे ग्रामीण महिलाओं के उत्पादों की पहुँच और भी बढ़ जाएगी।
डीसी अजय कुमार ने लोगों से इस मेले में ज़रूर आने की अपील की है। उन्होंने कहा, "लोगों से अपील की है कि वे बड़ी संख्या में इस मेले में पहुंचकर ग्रामीण अंचलों से आए शिल्पकारों एवं स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं का उत्साहवर्धन करें।" उन्होंने यह भी कहा कि यह मेला सिर्फ़ खरीदारी का मंच नहीं है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक विविधता, कला-शिल्प व आत्मनिर्भर बनतीं ग्रामीण नारी शक्ति का जीवंत उत्सव है। ऐसे आयोजनों से ग्रामीण महिलाओं को अपने हुनर को पहचान दिलाने का अवसर मिलता है।

मेले में बच्चों और बुजुर्गों का भी खास ध्यान रखा गया है। स्वाति शर्मा ने बताया कि छोटे बच्चों के लिए 'किड्स जोन' बनाया गया है। यहाँ बच्चों को खेल-खेल में ग्रामीण संस्कृति से रूबरू कराया जा रहा है। उनके लिए कहानी सुनाने के सत्र भी रखे गए हैं। वहीं, बुजुर्गों और महिलाओं के आराम के लिए जगह-जगह बैठने की व्यवस्था की गई है। शाम के समय में हर दिन अलग-अलग राज्यों के लोक नृत्य और संगीत की प्रस्तुतियाँ होंगी, जो मेले में चार चाँद लगा देंगी।

इस मेले की कुछ खास बातें ये हैं कि आम जनता के लिए प्रवेश बिल्कुल मुफ़्त है। आप सुबह 11 बजे से रात 9:30 बजे तक कभी भी मेले में आ सकते हैं। इस बार विभिन्न राज्यों की करीब 900 महिलाएँ 450 स्टॉलों पर अपने हाथों से बनाए हुए कलात्मक उत्पादों का प्रदर्शन कर रही हैं। यह मेला ग्रामीण महिलाओं के हुनर को दुनिया के सामने लाने का एक बेहतरीन मौका है।