MF का लेखा-जोखा

नवभारत टाइम्स

बाजार में हलचल के बावजूद एसआईपी में निवेशकों का भरोसा बना हुआ है। मिड और स्मॉल-कैप फंड में निवेश धीमा हुआ है। डेट फंड में अच्छी वापसी हुई है। फ्लेक्सी-कैप फंड निवेशकों की पहली पसंद बने हुए हैं। ईएलएसएस से पैसा निकला है। यह दिखाता है कि निवेशक समझदारी से निवेश कर रहे हैं।

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बाजार में उथल-पुथल के बावजूद, आम निवेश कों का सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान ( SIP ) पर भरोसा कायम है, जिसमें निवेश 31,000 करोड़ रुपये पर स्थिर बना हुआ है। हालांकि, मिड और स्मॉल-कैप फंड्स में शेयरों की ऊंची कीमतों के कारण निवेश की रफ्तार धीमी पड़ी है। वहीं, भारी निकासी के बाद डेट फंड्स में जनवरी में 74,827 करोड़ रुपये का जोरदार वापसी हुई है, जो फिक्स्ड इनकम वाले विकल्पों में निवेशकों की बढ़ती रुचि को दर्शाता है। इक्विटी योजनाओं में फ्लेक्सी-कैप फंड्स निवेशकों की पहली पसंद बने रहे, जबकि टैक्स बचाने वाली ELSS स्कीमों से पैसा निकाला गया।

आम निवेशक अभी भी SIP पर भरोसा दिखा रहे हैं। बाजार में भले ही उतार-चढ़ाव हो, लेकिन SIP के जरिए आने वाला पैसा 31,000 करोड़ रुपये पर टिका हुआ है। यह दिखाता है कि लोग लंबी अवधि के लिए निवेश करने से कतरा नहीं रहे हैं।
दूसरी ओर, मिड-कैप और स्मॉल-कैप फंड्स में निवेश की गति थोड़ी कम हुई है। इसका मुख्य कारण इन कंपनियों के शेयरों की कीमतें काफी बढ़ गई हैं। जब शेयर बहुत महंगे हो जाते हैं, तो निवेशक थोड़ा रुककर आगे का रास्ता देखते हैं।

अच्छी खबर यह है कि डेट फंड्स में फिर से पैसा आने लगा है। पिछले कुछ महीनों में इन फंड्स से काफी पैसा निकला था, लेकिन जनवरी में 74,827 करोड़ रुपये का निवेश आया है। इसका मतलब है कि निवेशक अब फिक्स्ड इनकम वाले सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर भी देख रहे हैं।

इक्विटी योजनाओं की बात करें तो, फ्लेक्सी-कैप फंड्स निवेशकों की पहली पसंद बने हुए हैं। इन फंड्स में सबसे ज्यादा पैसा लगाया गया है। फ्लेक्सी-कैप फंड्स वे होते हैं जो किसी भी आकार की कंपनी में निवेश कर सकते हैं, जिससे उन्हें बाजार के हिसाब से चलने में आसानी होती है। वहीं, टैक्स बचाने वाली ELSS स्कीमों से निवेशकों ने पैसा निकाला है। ELSS (Equity Linked Savings Scheme) में निवेश पर टैक्स में छूट मिलती है, लेकिन लॉक-इन पीरियड होता है।