दो वर्षों में 3.5 करोड़ से अधिक रोजगार सृजन का लक्ष्य

नवभारत टाइम्स

प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना से देश में 3.5 करोड़ से अधिक नए रोजगार सृजित होंगे। यह योजना बजट 2024-25 में घोषित की गई है। इसके तहत कर्मचारियों और नियोक्ताओं को वित्तीय प्रोत्साहन मिलेगा। लखनऊ में इस योजना के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। पंजीकरण और प्रमाणीकरण का कार्य तेजी से हो रहा है।

target of over 35 crore jobs pm vbry scheme to provide new boost
लखनऊ: प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PM-VBRY) के तहत दो साल में 3.5 करोड़ से ज़्यादा रोज़गार देने का बड़ा लक्ष्य रखा गया है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए लखनऊ के क्षेत्रीय कार्यालय ने ज़ोर-शोर से पंजीकरण, डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) और यूएएन (यूनिवर्सल अकाउंट नंबर) प्रमाणीकरण का अभियान चलाया है। योजना का मकसद नए रोज़गार पैदा करना और कर्मचारियों व कंपनियों दोनों को आर्थिक फायदा पहुंचाना है। बजट 2024-25 में घोषित इस योजना के लिए लखनऊ में 6,728 योग्य कंपनियों में से 4,062 ने पंजीकरण करा लिया है। इनसे 29,548 नए कर्मचारियों और 69,223 वापस काम पर लौटे कर्मचारियों को जोड़ा गया है। मार्च 2026 में होने वाले डीबीटी के पहले चरण के लिए पंजीकरण और पहचान का काम तेज़ी से चल रहा है।

क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त पी अश्विनी कुमार गुप्ता ने बताया कि इस योजना से देश में रोज़गार के नए अवसर खुलेंगे। उन्होंने कहा, "योजना का उद्देश्य नए रोजगार सृजन को बढ़ावा देना और कर्मचारियों व नियोक्ताओं दोनों को वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करना है।" इस अभियान में यह बात सामने आई है कि करीब 2,600 कंपनियाँ अभी तक इस योजना से नहीं जुड़ी हैं। साथ ही, लगभग 800 कर्मचारियों के बैंक खाते डीबीटी के लिए तैयार नहीं हैं। वहीं, करीब 400 कर्मचारियों का यूएएन फेस ऑथेंटिकेशन टेक्नोलॉजी से प्रमाणित नहीं हो पाया है। कुछ कंपनियाँ अगस्त 2024 से लगातार ईसीआर (कर्मचारी भविष्य निधि का मासिक रिटर्न) जमा नहीं कर रही हैं, जिससे उनकी पात्रता पर असर पड़ सकता है।
इन दिक्कतों को दूर करने के लिए क्षेत्रीय कार्यालय में एक खास हेल्प डेस्क बनाई गई है। यह हेल्प डेस्क उन कंपनियों और कर्मचारियों की मदद करेगी जिन्हें पंजीकरण या प्रमाणीकरण में परेशानी आ रही है। डीबीटी का मतलब है कि सरकारी पैसा सीधे आपके बैंक खाते में आएगा, जिससे बिचौलिए खत्म हो जाएंगे और पारदर्शिता बढ़ेगी। यूएएन फेस ऑथेंटिकेशन टेक्नोलॉजी आपके चेहरे की पहचान करके आपके खाते को सुरक्षित बनाती है। यह सुनिश्चित करेगा कि सही व्यक्ति को ही लाभ मिले। योजना के सफल कार्यान्वयन के लिए इन छोटी-छोटी समस्याओं को तुरंत सुलझाना बहुत ज़रूरी है। अगर कंपनियाँ समय पर ईसीआर जमा नहीं करेंगी, तो वे इस योजना के तहत मिलने वाले फायदों से वंचित रह सकती हैं। इसलिए, सभी कंपनियों को सलाह दी जाती है कि वे अपने ईसीआर समय पर जमा करें और अपने कर्मचारियों के डीबीटी और यूएएन प्रमाणीकरण को पूरा करवाएं।