Cji Suryakants Rohtak Visit Expresses Happiness Over Career Starting From Mdu Inspires Youth
MDU पहुंचे CJI, कहा- यहीं से मैंने शुरू किया था करियर
नवभारत टाइम्स•
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत रोहतक के महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय पहुंचे। उन्होंने विश्वविद्यालय में स्वर्ण द्वार का उद्घाटन किया। उन्हें विशिष्ट पूर्व छात्र अलंकरण से सम्मानित किया गया। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि उन्होंने यहीं से अपने करियर की शुरुआत की थी। उन्होंने युवाओं से अपनी क्षमता पर भरोसा करने और मेहनत करने का आह्वान किया।
रोहतक : सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत शनिवार को रोहतक पहुंचे। उन्होंने महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) में स्वर्ण द्वार का उद्घाटन किया और स्वर्ण जयंती समारोह में भाग लिया। एमडीयू ने उन्हें एक खास पूर्व छात्र के तौर पर सम्मानित किया। यूनिवर्सिटी ने उनके फैसलों में निष्पक्षता, मानवीय संवेदनशीलता और संविधान के प्रति अटूट विश्वास की खूब तारीफ की। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यह उनका अपना विश्वविद्यालय है, जहाँ से उन्होंने कानून की पढ़ाई शुरू की और फिर वकील बने। उन्होंने खुशी जताई कि वे भारत के मुख्य न्यायाधीश बनकर अपने विश्वविद्यालय आए हैं। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि इस मुकाम तक पहुंचना एक संघर्ष था। उन्होंने देश के हर युवा से आह्वान किया कि वे अपनी काबिलियत पर भरोसा रखें, मेहनत करें और लगन व ईमानदारी से काम करें।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय में स्वर्ण द्वार का उद्घाटन किया। यह कार्यक्रम एमडीयू के स्वर्ण जयंती समारोह का हिस्सा था। इस मौके पर यूनिवर्सिटी ने उन्हें एक खास सम्मान से नवाजा। उन्हें 'विशिष्ट पूर्व छात्र अलंकरण' से सम्मानित किया गया। यूनिवर्सिटी ने न्यायमूर्ति सूर्यकांत के फैसलों की बहुत प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि उनके फैसलों में हमेशा निष्पक्षता झलकती है। साथ ही, उनमें मानवीय संवेदनशीलता भी होती है। संविधान के प्रति उनका विश्वास भी बहुत मजबूत है।मुख्य न्यायाधीश ने अपने संबोधन में कहा कि यह विश्वविद्यालय उनका अपना है। उन्होंने यहीं से लॉ में दाखिला लिया था। यहीं से उन्होंने कानून की डिग्री हासिल की और अपने पेशेवर जीवन की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात की बहुत खुशी है कि वे भारत के मुख्य न्यायाधीश बनने के बाद अपने विश्वविद्यालय आए हैं।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि इस पद तक पहुंचना आसान नहीं था। यह अपने आप में एक संघर्ष था। उन्होंने पूरे भारतवर्ष के युवाओं को एक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि हर युवा को अपनी क्षमता पर भरोसा करना चाहिए। उन्हें कड़ी मेहनत करनी चाहिए। साथ ही, लगन और ईमानदारी से अपना काम करना चाहिए।