कर्मचारियों को दी स्वच्छ सर्वेक्षण की नई टूलकिट की जानकारी

नवभारत टाइम्स

गुड़गांव में स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 के लिए प्रशिक्षण कार्यशाला हुई। इसमें अधिकारियों को नई टूलकिट और मूल्यांकन प्रणाली समझाई गई। शहरों की स्वच्छता का निष्पक्ष आकलन होगा। 10 प्रमुख मानदंडों पर रैंकिंग तय होगी। गलत जानकारी देने पर अंक कटेंगे। ओडीएफ++ और वाटर+ प्रमाणन के मानक भी बताए गए। यह स्थायी स्वच्छता प्रणाली विकसित करने का अवसर है।

swachh survekshan 2025 26 employees informed about new toolkit and simplified evaluation system
गुड़गांव में स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 की तैयारियों को लेकर मंडल स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में गुड़गांव, रोहतक और फरीदाबाद मंडलों के शहरी स्थानीय निकायों के अधिकारियों और कर्मचारियों ने भाग लिया। नई टूलकिट, बदली हुई मूल्यांकन प्रणाली और प्रमाणन मानकों की जानकारी दी गई। इस बार सर्वेक्षण को सरल, पारदर्शी और परिणाम-केंद्रित बनाया गया है ताकि शहरों की स्वच्छता का सही आकलन हो सके।

नगर निगम गुड़गांव के कमिश्नर प्रदीप दहिया, अडिशनल कमिश्नर यश जालुका और हरियाणा के स्टेट मिशन निदेशक (एसबीएम-अर्बन) शाश्वत सांगवान ने अधिकारियों को नई व्यवस्था के अनुसार तैयारी करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्वच्छ सर्वेक्षण सिर्फ रैंकिंग के लिए नहीं है, बल्कि शहरों में स्थायी स्वच्छता व्यवस्था बनाने का एक बड़ा मौका है।
नई टूलकिट के तहत शहरों का मूल्यांकन 10 मुख्य बातों पर होगा। इन 10 बातों के आधार पर 12,500 अंकों की रैंकिंग तय की जाएगी। इन बातों में शामिल हैं: साफ-सफाई दिखना, कचरे को अलग करना, कचरा उठाना और ले जाना, ठोस कचरे का प्रबंधन, शौचालयों की सुविधा, सीवेज का प्रबंधन, मशीनों से सफाई, लोगों को जागरूक करना, संस्थाओं को मजबूत बनाना और लोगों की राय जानना। अगर कोई गलत जानकारी देता है तो उसके अंक काटे जाएंगे और नकारात्मक अंक भी मिल सकते हैं।

कार्यशाला में ओडीएफ++ (ODF++) और वाटर+ (Water+) प्रमाणन के लिए जरूरी मानकों की भी जानकारी दी गई। ओडीएफ++ का मतलब है कि शहर खुले में शौच से मुक्त है और वहां ठोस व तरल कचरे का भी ठीक से प्रबंधन होता है। वाटर+ का मतलब है कि शहर में पीने के पानी की उपलब्धता और सीवेज प्रबंधन की व्यवस्था अच्छी है।

इस बार के स्वच्छ सर्वेक्षण में शहरों की वास्तविक स्वच्छता स्थिति का निष्पक्ष आकलन करने पर जोर दिया गया है। अधिकारियों को बताया गया कि सर्वेक्षण प्रक्रिया को इस तरह से बदला गया है कि यह अधिक सरल और परिणाम-केंद्रित हो। इसका मुख्य उद्देश्य शहरों में स्थायी स्वच्छता प्रणाली को बढ़ावा देना है।