रिहायशी इलाके में डंपिंग यार्ड बनाने के फैसले का विरोध

नवभारत टाइम्स

द्वारका एक्सप्रेसवे के पास रहने वाले लोगों ने सेक्टर-103 और 106 में कंस्ट्रक्शन वेस्ट डंपिंग यार्ड बनाने का विरोध किया। 500 से अधिक स्थानीय लोग प्रदर्शन में शामिल हुए। उन्होंने प्रशासन से फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की। लोगों का कहना है कि इससे बच्चों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ेगा।

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गुड़गांव: द्वारका एक्सप्रेसवे के पास रहने वाले सैकड़ों लोगों ने रविवार को कंस्ट्रक्शन वेस्ट डंपिंग यार्ड बनाने के फैसले का पुरजोर विरोध किया। सेक्टर-103 और 106 के निवासी, जिनमें 500 से ज्यादा लोग शामिल थे, सड़कों पर उतर आए और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने गोडरेज मेरिडियन के पास इकट्ठा होकर प्रशासन से अपने फैसले पर दोबारा विचार करने की मांग की। लोगों का कहना है कि यह डंपिंग यार्ड एक प्ले स्कूल से सिर्फ 50 मीटर की दूरी पर है और इसके आसपास कई रिहायशी सोसायटियां भी हैं। उनका मानना है कि धूल, मलबा और भारी वाहनों की लगातार आवाजाही से बच्चों के स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर पड़ेगा। निवासियों ने साफ किया कि वे कचरा प्रबंधन के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन घनी आबादी वाले इलाके में इस तरह का प्लांट लगाना बिल्कुल भी सही नहीं है। उन्होंने सोशल मीडिया पर भी अभियान तेज कर दिया है और डिजिटल स्ट्राइक का आह्वान किया है।

लोगों की मुख्य मांग है कि इस इलाके में कंस्ट्रक्शन वेस्ट डंपिंग यार्ड बनाने की बजाय पार्क, प्ले ग्राउंड या ग्रीन एरिया विकसित किया जाए। भारत नैन ने चिंता जताते हुए कहा कि धूल और ट्रकों की आवाजाही से उनकी जिंदगी बुरी तरह प्रभावित होगी। सुनील सरीन ने इस बात पर जोर दिया कि शहर के विकास के लिए बच्चों की सेहत से समझौता नहीं किया जा सकता। प्रखर ने चेतावनी दी कि अगर जरूरत पड़ी तो लोग कानूनी और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। निवासियों का कहना है कि इस तरह के डंपिंग यार्ड से इलाके में प्रदूषण बढ़ेगा और रहने लायक माहौल खराब होगा। वे नहीं चाहते कि उनके बच्चे धूल और शोर के बीच बड़े हों। उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि वह लोगों की भावनाओं और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए कोई दूसरा स्थान चुने।