'गरीब, किसान और बहुजन का भरोसा खो रहीं सरकारें'

नवभारत टाइम्स

बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने कहा कि सरकारें गरीब, किसान और बहुजन का भरोसा खो रही हैं। उन्होंने कहा कि द्वेषपूर्ण नीतियां और कथनी करनी में अंतर सरकार की कार्यवाहियों में साफ दिखता है। मायावती ने कहा कि बसपा सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय की नीति पर चलती है। विपक्षी दल पूंजीपतियों के इशारे पर काम करते हैं।

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लखनऊ: बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने रविवार को आयोजित एक ऑल इंडिया मीटिंग में केंद्र और राज्य सरकारों पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ये सरकारें गरीब , किसान और बहुजन का भरोसा खो रही हैं। मायावती ने आरोप लगाया कि इन सरकारों की नीतियां द्वेषपूर्ण हैं और कथनी-करनी में भारी अंतर साफ दिखता है। उन्होंने यूपी में चार बार बनी बसपा की सरकार का जिक्र करते हुए कहा कि बसपा ने 'सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय' की नीति पर चलकर यूपी में कानून का राज स्थापित किया था। इसी वजह से लोगों को एक बार फिर बसपा से उम्मीद जगी है। बैठक में बसपा ने यूपी के संगठन की तारीफ की और बाकी राज्य इकाइयों को भी इसी तरह का संगठन तैयार करने का निर्देश दिया।

मायावती ने उन नेताओं पर भी निशाना साधा जो बसपा से निकल चुके हैं या जिन्हें निकाला गया है। उन्होंने ऐसे नेताओं को बसपा के मिशन के लिए नुकसानदायक बताया और इनसे सावधान रहने की जरूरत जताई। मायावती ने कहा, "ऐसे लोग बीएसपी के कारण ही आगे बढ़े। इसके बावजूद जब वो बीएसपी के नहीं हुए तो समाज के सच्चे हितैषी कैसे हो सकते हैं? ऐसे लोगों और उन्हें शरण देने वाली पार्टियों से भी सावधान रहने की जरूरत है।" उन्होंने इशारों-इशारों में सपा पर भी हमला बोला।
बसपा सुप्रीमो ने कहा कि उनकी पार्टी दलित, वंचित, गरीब और किसानों के चंदों से चलती है। वहीं, विपक्षी दल धन्नासेठों और पूंजीपतियों के चंदे पर काम करते हैं। यही कारण है कि विपक्षी दलों की सरकारें बनने के बाद वे पूंजीपतियों के इशारे पर काम करती हैं। उन्होंने बताया कि बीएसपी अपने लोगों के खून-पसीने की कमाई पर निर्भर रहती है, इसलिए उस पर कोई दबाव नहीं होता।

मायावती ने अमेरिका के साथ हुई ट्रेड डील पर केंद्र सरकार को सुझाव दिया कि वे किसान और बहुजन के हितों को ध्यान में रखते हुए ही डील की शर्तें फाइनल करें। उन्होंने कहा कि सरकारें अब जनता का विश्वास खो रही हैं। उनकी नीतियां ठीक नहीं हैं और वे जो कहती हैं, वह करती नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि बसपा हमेशा से आम आदमी के साथ खड़ी रही है। यूपी में जब बसपा की सरकार बनी थी, तब सभी का भला हुआ था और सभी को सुख मिला था। इसीलिए लोग अब फिर से बसपा को मौका देना चाहते हैं। बैठक में यूपी के संगठन की खूब तारीफ हुई और बाकी राज्यों की इकाइयों को भी ऐसा ही मजबूत संगठन बनाने के लिए कहा गया।

मायावती ने उन नेताओं को भी आड़े हाथों लिया जो बसपा छोड़कर चले गए। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग बसपा की वजह से ही आगे बढ़े थे, लेकिन जब वे पार्टी के नहीं रहे तो वे समाज के हितैषी कैसे हो सकते हैं। उन्होंने लोगों को ऐसे नेताओं और उन्हें पनाह देने वाली पार्टियों से सावधान रहने की सलाह दी।

बसपा सुप्रीमो ने साफ कहा कि उनकी पार्टी गरीबों और किसानों के पैसों से चलती है, जबकि दूसरी पार्टियां बड़े व्यापारियों और पूंजीपतियों के पैसों पर चलती हैं। इसी वजह से जब दूसरी पार्टियां सत्ता में आती हैं तो वे उन्हीं बड़े लोगों के लिए काम करती हैं। बसपा की खासियत यह है कि वह किसी के दबाव में नहीं आती क्योंकि वह अपने लोगों की मेहनत की कमाई पर चलती है।

उन्होंने केंद्र सरकार से यह भी कहा कि अमेरिका के साथ जो ट्रेड डील हो रही है, उसमें किसानों और आम लोगों का ध्यान रखा जाए। डील की शर्तें ऐसी हों जो सबके हित में हों।