Son Machhariya And Sakha Spread Mithilas Colors At Bharat Rang Mahotsav
'सोन मछरिया' और 'सखा' ने रंगमंच पर रचा जादू
नवभारत टाइम्स•
नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के 25वें भारत रंग महोत्सव में तीन नाटकों का मंचन हुआ। 'सोन मछरिया' ने मल्लाह समाज के शोषण को दिखाया। 'सखा' और 'पांच पत्र' ने जीवन के विभिन्न पहलुओं को संवेदनशीलता से उकेरा। इन नाटकों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कलाकारों के अभिनय ने खूब सराहना बटोरी।
नई दिल्ली: नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) द्वारा आयोजित 25वें भारत रंग महोत्सव में हाल ही में तीन नाटकों का मंचन हुआ, जिन्होंने मिथिला की सामाजिक और सांस्कृतिक झलक दर्शकों के सामने पेश की। 16 फरवरी को 'सोन मछरिया', 17 फरवरी को 'सखा' और 19 फरवरी को 'पांच पत्र' जैसे नाटकों ने दर्शकों का मन मोह लिया। इन नाटकों के ज़रिए मिथिला के समाज की गहराई को मंच पर उतारा गया।
'सोन मछरिया' नाटक दरभंगा के दोनार मछली बाज़ार की कहानी कहता है। यह नाटक मल्लाह समुदाय में जन्मी तेतरी के साथ होने वाले सामाजिक शोषण को दिखाता है। नाटक में दिखाया गया है कि कैसे तेतरी ने जनसेवा के ज़रिए मल्लाह समाज को दबंग ज़मींदार के अत्याचारों और उस समय की गरीबी से बाहर निकालने की कोशिश की। तेतरी का प्यार और अंत में अपने पति से उसका फिर से मिलना दर्शकों को बहुत भावुक कर गया। शुभम कर्ण, रचना दास, संजीव बिट्टू, सत्यम कर्ण, राजेश कर्ण, मुकेश दत्त, रोहित शांडिल्य, सुरेंद्र झा, नीरा झा, छवि दास, सुप्रिया मिश्र, मृत्युंजय चौधरी, अनुज कुमार, रजत राणा और सुबोध कुमार साहा ने अपने शानदार अभिनय से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।इसी तरह, 'पांच पत्र' नाटक पत्र-शैली में लिखा गया है। इसमें एक व्यक्ति के जीवन के अलग-अलग पड़ावों को बड़ी संवेदनशीलता से दिखाया गया है। यह नाटक जवानी की कल्पनाओं से लेकर पारिवारिक ज़िम्मेदारियों, संघर्षों और अंत में जीवन के प्रति बदले हुए नज़रिया को दर्शाता है। नाटककार महेंद्र मलंगिया ने इसे एक प्रभावशाली नाट्य रूप दिया। मुख्य किरदार कृष्ण की भूमिका में नितीश झा और नायिका की भूमिका में दीप्ति झा ने अपने भावनात्मक अभिनय से दर्शकों को गहराई तक छुआ। उनके बेटे बंगट के किरदार में प्रकाश झा ने भी अपनी मज़बूत उपस्थिति दर्ज कराई और खूब तालियां बटोरीं।
यह महोत्सव मिथिला की कला और संस्कृति को राष्ट्रीय मंच पर लाने का एक बेहतरीन ज़रिया बना। इन नाटकों ने न केवल मनोरंजन किया, बल्कि दर्शकों को समाज के विभिन्न पहलुओं पर सोचने के लिए भी प्रेरित किया। कलाकारों के दमदार अभिनय और निर्देशक की कुशल निर्देशन ने इन नाटकों को यादगार बना दिया।