50 Salary Of Government Employees Not Logging Into E office Will Be Stopped Cms Strict Instructions
ई-ऑफिस पर लॉगिन नहीं किया, 50% का रुकेगा वेतन
नवभारत टाइम्स•
मुख्यमंत्री के कड़े निर्देशों के बावजूद सरकारी दफ्तरों में ई-ऑफिस का इस्तेमाल नहीं हो रहा है। करीब 50% कर्मचारियों ने ई-ऑफिस पर लॉगिन नहीं किया है। इसके चलते जिम्मेदार अधिकारियों का वेतन रोका जाएगा। जिन दफ्तरों में ई-ऑफिस शुरू नहीं हुआ, वहां विभागाध्यक्ष जिम्मेदार होंगे। सरकार कार्य गति बढ़ाने और पारदर्शिता लाने के लिए यह कदम उठा रही है।
लखनऊ: सरकारी दफ्तरों में फाइलों को ऑनलाइन करने और डिजिटल तरीके से काम करने में भारी लापरवाही सामने आई है। सीएम के कड़े निर्देशों के बावजूद, दिसंबर-जनवरी की रिपोर्ट बताती है कि करीब 50% कर्मचारियों ने ई-ऑफिस पर लॉगिन ही नहीं किया है, जहां उन्हें ई-फाइल से काम करना था। इस पर सीएम कार्यालय ने सख्त रुख अपनाते हुए जिम्मेदार अधिकारियों का वेतन रोकने और ई-ऑफिस शुरू न करने वाले विभागाध्यक्षों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए हैं। सरकार की मंशा थी कि इससे काम तेज होगा, पारदर्शिता बढ़ेगी और बिचौलियों का खेल खत्म होगा, लेकिन दफ्तरों का रवैया इस पर भारी पड़ रहा है।
सरकार ने पिछले साल ही आदेश जारी कर दिया था कि सचिवालय, निदेशालय, मुख्यालय, मंडल, जिला, तहसील और विकास खंड जैसे सभी सरकारी दफ्तरों में 30 अप्रैल से फाइलों को सिर्फ ई-ऑफिस के जरिए ही आगे बढ़ाया जाए। इसके बाद किसी भी हालत में फाइलें ऑफलाइन नहीं चलेंगी। इस आदेश का मकसद कामकाज में तेजी लाना, पारदर्शिता बढ़ाना और बिचौलियों की भूमिका खत्म करना था। लेकिन, जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।ई-ऑफिस को लागू करने की जिम्मेदारी यूपी इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन लिमिटेड को सौंपी गई है। एजेंसी ने 20 दिसंबर से 20 जनवरी तक ई-ऑफिस के इस्तेमाल की विभागवार रिपोर्ट तैयार की है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश में कुल 84,921 पटल या विभागीय स्तर ऐसे हैं जहां ई-ऑफिस का इस्तेमाल होना है। इनमें विभागाध्यक्ष से लेकर बाबू तक शामिल हैं। लेकिन, समीक्षा अवधि में इनमें से 42,147 कर्मचारियों ने ई-ऑफिस में लॉगिन ही नहीं किया। यह कुल उपयोगकर्ताओं का लगभग 49.63% है।
कुछ विभागों में तो स्थिति और भी चिंताजनक है। नागरिक उड्डयन, राजनीतिक पेंशन, भाषा, कार्मिक और चिकित्सा शिक्षा जैसे विभागों में 80% से ज्यादा कर्मचारियों ने ई-ऑफिस में लॉगिन नहीं किया। न्याय विभाग की हालत तो सबसे खराब है, जहां 97% से ज्यादा कर्मचारियों ने ई-ऑफिस से दूरी बनाए रखी। यहां तक कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने वाले औद्योगिक विभाग, नगर विकास विभाग और राज्य संपत्ति विभाग में भी 71% कर्मचारियों ने ई-ऑफिस का इस्तेमाल नहीं किया। यह दिखाता है कि डिजिटल इंडिया के सपने को साकार करने में सरकारी महकमे कितने पीछे हैं।
ई-ऑफिस का मतलब है कि फाइलों को कंप्यूटर पर ही बनाया और आगे बढ़ाया जाएगा। इससे कागजी कार्रवाई कम होगी, फाइलें जल्दी निपटेगी और किसी को भी यह पता नहीं चलेगा कि फाइल कहां अटकी है। इससे भ्रष्टाचार पर भी लगाम लगेगी। लेकिन, जब कर्मचारी ही इसे इस्तेमाल नहीं करेंगे तो सरकार की मंशा कैसे पूरी होगी। सीएम कार्यालय के इस सख्त कदम से उम्मीद है कि सरकारी दफ्तरों में डिजिटल क्रांति आएगी और काम में तेजी आएगी।