n NBT रिपोर्ट, लखनऊ : वॉटर ऐंड पावर कंसल्टेंसी सर्विसेज (WAPCOS) में ठेके के लिए अफसरों और ठेकेदारों के बीच एक करोड़ का कमिशन तय हुआ था। सीबीआई की पड़ताल में खुलासा हुआ है कि यह नेटवर्क सिर्फ रिश्वत का आदान-प्रदान नहीं था, बल्कि एक हाईटेक, मल्टी लेयर ऑपरेशन की तरह काम कर रहा था, जिसमें हर कलेक्शन के लिए अलग मोबाइल फोन सिम, लेनदेन के लिए नोट नंबर की पूर्व पुष्टि, हवाला चैनलों से अडवांस भुगतान और कलेक्शन एजेंटों की भूमिका तय थी।
WAPCOS भुवनेश्वर के प्रॉजेक्ट मैनेजर पंकज दुबे ने ठेकेदारों से लेकर बिचौलियों, हवाला ऑपरेटरों और ‘कलेक्शन मैनेजरों’ तक एक व्यवस्थित नेटवर्क बनाया था। इसमें हर भुगतान प्रक्रिया के लिए अलग मोबाइल फोन और SIM के इस्तेमाल करने के निर्देश दिए गए हैं। शनिवार को हुई गिरफ्तारियों के दौरान भी यह बात सामने आई है कि ठेकेदार बबलू सिंह यादव को पंकज दुबे ने एक नया मोबाइल फोन और SIM खरीदकर देने को कहा, जो केवल कमिशन लेन-देन और संवाद के लिए इस्तेमाल होना था। यह वही फोन था जिससे डिलिवरी की लोकेशन तय की जाती, रकम की पुष्टि होती और ‘कलेक्शन एजेंट’ से लिंक स्थापित होता। यह दर्शाता है कि रैकेट ट्रेस रिस्क कम करने के लिए हर डिलिवरी के लिए अलग कन्वर्सेशन चैनल बनाता था।
पड़ताल में यह भी सामने आया है कि 20 फरवरी 2026 को बबलू सिंह यादव जब 10 लाख रुपये भेजने वाला था, तब ‘कलेक्शन एजेंट’ शुभम पाल (राहुल वर्मा का सहयोगी) ने एक करेंसी नोट का नंबर पहले ही भेजने को कहा। यह नोट दिखाने पर ही लेन देन होता।

