एन चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल पर टाटा संस बोर्ड ने फैसला टाला

नवभारत टाइम्स
एन चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल पर टाटा संस बोर्ड ने फैसला टाला
टाटा संस के बोर्ड ने नटराजन चंद्रशेखरन को चेयरमैन के तौर पर तीसरा कार्यकाल देने का फैसला फिलहाल टाल दिया है। यह फैसला मंगलवार को मुंबई में हुई बोर्ड मीटिंग में लिया गया, जिससे कंपनी के अंदर चल रहे कुछ मतभेदों का संकेत मिलता है। चंद्रशेखरन का मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 में खत्म हो रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति के लिए कुछ शर्तें रखी हैं। हालांकि, बोर्ड के बाकी चार डायरेक्टरों - वेणु श्रीनिवासन, हरीश मनवानी, अनीता जॉर्ज और सौरभ अग्रवाल - को चंद्रशेखरन का कार्यकाल बढ़ाने से कोई आपत्ति नहीं थी। इन चार डायरेक्टरों का मानना है कि किसी एक कंपनी के घाटे की वजह से पूरे ग्रुप के प्रदर्शन या पिछले सालों में चेयरमैन के योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। कुछ डायरेक्टर तो इस मुद्दे पर वोटिंग कराना चाहते थे, लेकिन चंद्रशेखरन ने खुद ही इस फैसले को टालने का अनुरोध किया।
यह मीटिंग ग्रुप के मुख्यालय 'बॉम्बे हाउस' में हुई और काफी लंबी चली। मीटिंग के बाद कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। नटराजन चंद्रशेखरन 1987 में टाटा ग्रुप से जुड़े थे। उन्होंने पहले टाटा ग्रुप की आईटी कंपनी टीसीएस (TCS) के सीईओ के तौर पर काम किया। इसके बाद, फरवरी 2017 में उन्होंने टाटा संस के चेयरमैन का पद संभाला। चंद्रशेखरन को ग्रुप को फिर से संगठित करने और उसे मजबूत बनाने का श्रेय दिया जाता है। उनके कार्यकाल के दौरान कई बड़े और महत्वपूर्ण रणनीतिक फैसले लिए गए, जिन्होंने ग्रुप को नई दिशा दी।

टाटा संस के बोर्ड का यह फैसला कई मायनों में अहम है। यह दर्शाता है कि कंपनी के भीतर नेतृत्व को लेकर चर्चाएं चल रही हैं। चेयरमैन के कार्यकाल को बढ़ाना एक महत्वपूर्ण निर्णय होता है, और इसमें सभी की सहमति जरूरी होती है। नोएल टाटा द्वारा रखी गई शर्तें और कुछ डायरेक्टरों की वोटिंग की इच्छा, इस बात की ओर इशारा करती है कि बोर्ड में अलग-अलग विचार मौजूद हैं।

चंद्रशेखरन का टाटा ग्रुप के साथ लंबा जुड़ाव रहा है। टीसीएस के सीईओ के रूप में उन्होंने कंपनी को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया था। चेयरमैन बनने के बाद उन्होंने टाटा ग्रुप में कई बड़े बदलाव किए। उनके नेतृत्व में ग्रुप ने कई नई पहलों की शुरुआत की और अपने कारोबार का विस्तार किया। ऐसे में, उनके कार्यकाल को आगे बढ़ाना या न बढ़ाना, ग्रुप के भविष्य की दिशा के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। बोर्ड की अगली मीटिंग में इस मुद्दे पर क्या फैसला होता है, यह देखना दिलचस्प होगा।