विश्व व्यापार संगठन (WTO) की विवाद निपटान संस्था ने एक पैनल बनाया है। यह पैनल भारत के ऑटोमोबाइल और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर से जुड़े कुछ नियमों पर चीन की शिकायत की जांच करेगा। चीन ने पिछले साल अक्टूबर में आरोप लगाया था कि भारत की PLI स्कीम वैश्विक व्यापार नियमों के खिलाफ है।
एक अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी। भारत और चीन दोनों WTO के सदस्य हैं। अगर किसी सदस्य देश को लगता है कि दूसरे देश की कोई नीति उसके निर्यात को नुकसान पहुंचा रही है, तो वह WTO के विवाद निपटान तंत्र में शिकायत दर्ज करा सकता है।इस मामले में, चीन ने भारत की कुछ नीतियों को WTO के नियमों के विरुद्ध बताया है। WTO का विवाद निपटान तंत्र एक ऐसी व्यवस्था है जहाँ सदस्य देश व्यापार से जुड़े विवादों को सुलझा सकते हैं। यह पैनल अब दोनों पक्षों की दलीलें सुनेगा और जांच करेगा कि क्या भारत की नीतियां वास्तव में वैश्विक व्यापार नियमों का उल्लंघन करती हैं।
PLI स्कीम का मतलब है 'प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव' स्कीम। यह भारत सरकार की एक योजना है जो घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कंपनियों को प्रोत्साहन देती है। चीन का कहना है कि इस स्कीम की कुछ शर्तें विदेशी कंपनियों के लिए भेदभावपूर्ण हैं और यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार के नियमों के अनुसार नहीं है।
WTO में शिकायत दर्ज कराने के बाद, संस्था पहले मध्यस्थता का प्रयास करती है। यदि मध्यस्थता सफल नहीं होती है, तो एक पैनल का गठन किया जाता है। यह पैनल मामले की गहराई से जांच करता है और अपना फैसला सुनाता है। इस फैसले का दोनों देशों के व्यापार पर असर पड़ सकता है।