‘सिक्के केवल मुद्रा नहीं, इतिहास का दस्तावेज’

नवभारत टाइम्स

लखनऊ के राज्य संग्रहालय में एक विशेष व्याख्यान हुआ। इसमें भारत की मौद्रिक यात्रा पर चर्चा हुई। सिक्कों को इतिहास का महत्वपूर्ण दस्तावेज बताया गया। ये तत्कालीन राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक स्थिति दर्शाते हैं। आजादी के बाद के आधुनिक सिक्कों पर भी प्रकाश डाला गया। यह सत्र ज्ञानवर्धक रहा।

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लखनऊ: राज्य संग्रहालय में मंगलवार को 'कला अभिरुचि पाठ्यक्रम' के तहत एक खास लेक्चर हुआ। इसमें भारत के पुराने सिक्कों के ज़रिए देश के आर्थिक और सांस्कृतिक इतिहास को समझा गया। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अमित कुमार उपाध्याय ने बताया कि सिक्के सिर्फ लेन-देन का ज़रिया नहीं, बल्कि उस समय के राजाओं, अर्थव्यवस्था और संस्कृति की कहानी बताते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि मुद्राशास्त्र (सिक्कों का अध्ययन) में रिसर्च करते समय क्या-क्या मुश्किलें आती हैं। इस मौके पर राज्य संग्रहालय के डायरेक्टर डॉ. विनय कुमार सिंह ने आज़ादी के बाद के भारतीय सिक्कों के बारे में जानकारी दी।

डॉ. अमित कुमार उपाध्याय ने इस सत्र में विस्तार से समझाया कि कैसे सिक्के इतिहास को समझने का एक मज़बूत ज़रिया हैं। उन्होंने कहा, "ये केवल विनिमय का साधन नहीं, बल्कि तत्कालीन राजनैतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक स्थिति के महत्वपूर्ण दस्तावेज हैं।" इसका मतलब है कि सिक्के हमें उस ज़माने के राजाओं, उनके राजकाज, लोगों की आर्थिक हालत और उनकी संस्कृति के बारे में बहुत कुछ बताते हैं। उन्होंने मुद्राशास्त्र की बारीकियों और इस क्षेत्र में शोध करने में आने वाली चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला।
राज्य संग्रहालय के निदेशक डॉ. विनय कुमार सिंह ने इस लेक्चर में आज़ादी के बाद के आधुनिक भारतीय सिक्कों पर अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि कैसे समय के साथ हमारे सिक्कों में बदलाव आया है। इस खास मौके पर डॉ. मीनाक्षी खेमका, रेनू द्विवेदी, अलशाज फातमी और डॉ. कृष्ण सिंह भी मौजूद रहे। यह लेक्चर कला और इतिहास में रुचि रखने वाले लोगों के लिए काफी जानकारी भरा रहा।