KGMU में भ्रष्टाचार का मुद्दा विधानसभा में गूंजा

नवभारत टाइम्स

किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी केजीएमयू के ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग में बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। यहां महंगे उपकरण खरीदे गए और मनमाने तरीके से खर्च किया गया। मरीज की जांच के नाम पर ज्यादा पैसे वसूले गए। इस मामले की शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंची। अब शासन ने केजीएमयू प्रशासन से जवाब मांगा है।

kgmu corruption issue echoes in assembly allegations of expensive equipment purchase and financial irregularities
लखनऊ: किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग में बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ियां सामने आई हैं। सपा विधायक आरके वर्मा ने विधानसभा में इस मुद्दे को उठाते हुए आरोप लगाया कि विभाग में जरूरत से ज्यादा महंगे उपकरण खरीदे गए और पैसों का मनमाना खर्च किया गया। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री से जवाब मांगा, जिसके बाद शासन ने केजीएमयू प्रशासन से जवाब तलब किया है।

परचेज कमिटी की एक रिपोर्ट ने इस वित्तीय भ्रष्टाचार का पर्दाफाश किया है। रिपोर्ट के अनुसार, मरीजों के ब्लड ग्रुप का पता लगाने वाली एक जांच, जिसे 'एबीडी पैड' कहते हैं, सिर्फ 5 रुपये में हो सकती है, लेकिन केजीएमयू में इसके लिए 85 रुपये वसूले जा रहे थे। एनबीटी ने इस गड़बड़ी को प्रमुखता से उजागर किया था। इसी तरह, थैलेसीमिया और ल्यूकीमिया जैसे गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों के लिए होने वाली 'एक्सटेंडेड फेनोटाइप ब्लड ग्रुपिंग' की जांच 63 रुपये के बजाय 165 रुपये में कराई गई।
विधायक आरके वर्मा ने यह भी गंभीर आरोप लगाया कि उपकरण सप्लाई करने वाले ठेकेदारों और विभाग के अधिकारियों के बीच मिलीभगत है और लग्जरी गाड़ियों का लेन-देन भी हुआ है। उन्होंने बताया कि इस मामले की शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) तक भी पहुंची थी। पीएमओ से कार्रवाई के निर्देश मिलने के बावजूद केजीएमयू प्रशासन ने कोई कदम नहीं उठाया।

इस पूरे मामले पर केजीएमयू के प्रवक्ता प्रो. केके सिंह ने कहा है कि शासन द्वारा मांगी गई सभी जानकारी जल्द ही उपलब्ध करा दी जाएगी। यह मामला अब विधानसभा में उठने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। मरीजों के इलाज से जुड़े महत्वपूर्ण जांचों में इस तरह की वित्तीय अनियमितताएं स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े करती हैं।

यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली पर विधानसभा में चर्चा चल रही थी। विधायक वर्मा ने ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग के अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच सांठगांठ की आशंका भी जताई थी। इस मामले की जांच होने पर और भी कई बड़े खुलासे होने की उम्मीद है। मरीजों के पैसों का इस तरह दुरुपयोग होना चिंता का विषय है।