सूत्रों का कहना है कि टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति के लिए कई शर्तें रख दीं। इसकी वजह से आखिरी समय पर फैसला टालना पड़ा। बता दें कि टाटा ट्रस्ट की टाटा संस में दो-तिहाई (करीब 66%) हिस्सेदारी है। सूत्रों ने बताया कि नोएल टाटा ने ग्रुप की कुछ कंपनियों में हो रहे घाटे पर चिंता जताई है। उनकी शर्तों में यह भी शामिल है कि टाटा संस पर और कर्ज न बढ़ाया जाए। दरअसल, कर्ज बढ़ने से ऐसी स्थिति बन सकती है जहां नियमों के मुताबिक कंपनी को मजबूरी में शेयर बाजार में लिस्ट होना पड़ सकता है। नोएल टाटा, टाटा संस की लिस्टिंग ( IPO ) के सख्त खिलाफ हैं।
सूत्रों के अनुसार, चंद्रशेखरन ने बोर्ड को समझाया कि इस बात का पक्का वादा करना बहुत मुश्किल है कि कंपनी कभी लिस्ट होगी ही नहीं। उन्होंने कहा कि सरकारी नियमों और कायदों के हिसाब से चीजें बदलती रहती हैं और कंपनियों को उन नियमों का पालन करना ही पड़ता है।

