पूरे विश्व में विख्यात हो रही उत्तराखंडी टोपी: धामी

नवभारत टाइम्स

उत्तराखंड की पारंपरिक टोपी अब दुनिया भर में पहचानी जा रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लखनऊ में उत्तरायणी कौथिग के उद्घाटन समारोह में यह बात कही। उन्होंने पीएम मोदी को इसका श्रेय दिया। धामी ने कहा कि यह टोपी उत्तराखंड की संस्कृति का प्रतीक है। इस अवसर पर मेयर सुषमा खर्कवाल को उत्तराखंड गौरव सम्मान मिला।

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लखनऊ में आयोजित उत्तरायणी कौथिग में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शिरकत की। उन्होंने पीएम मोदी को उत्तराखंड की पारंपरिक टोपी को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने का श्रेय दिया। धामी ने बताया कि कैसे लंदन में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने उत्तराखंड की पारंपरिक वेशभूषा और टोपी पहने सैकड़ों लोगों को देखकर खुद को उत्तराखंड में ही महसूस किया था। यह महोत्सव उत्तराखंड की संस्कृति और जड़ों से जुड़ाव का प्रतीक है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि हम दुनिया के किसी भी कोने में रहें, हमारी बोली-भाषा से हमारा रिश्ता कभी नहीं टूटता। ऐसे महोत्सव हमारे बुनकरों और छोटे उत्पादकों को आर्थिक मदद और सम्मान दिलाते हैं। उन्होंने पीएम मोदी के 'वोकल फॉर लोकल' अभियान की सराहना की, जो एक बेहतरीन मिसाल है। धामी ने लखनऊ से अपने खास भावनात्मक जुड़ाव को भी साझा किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने यहीं शिक्षा प्राप्त की और समाज व राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों को समझा। लखनऊ ने उन्हें सोचने की दिशा दी और छात्र राजनीति के दौरान संघर्ष करना सिखाया। उन्होंने पीएम मोदी के दृढ़ निश्चय का उदाहरण देते हुए काशी कॉरिडोर और अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का जिक्र किया।
इस कार्यक्रम में लखनऊ की मेयर सुषमा खर्कवाल को 'उत्तराखंड गौरव सम्मान' से नवाजा गया। मेयर खर्कवाल ने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए बताया कि जब उन्होंने राजनीति की शुरुआत की थी, तब उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड एक ही था। उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने और धामी ने मिलकर उत्तराखंड आंदोलन में भाग लिया था। आज यह उनका सौभाग्य है कि जिस मांग को लेकर उन्होंने आंदोलन किया था, उसी आंदोलन से निकले पुष्कर सिंह धामी आज उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हैं।

पर्वतीय महापरिषद और उत्तराखंड राज्य के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में बीरबल साहनी मार्ग स्थित पं. गोविन्द बल्लभ पंत पर्वतीय सांस्कृतिक उपवन में उत्तरायणी कौथिग का आयोजन किया गया था। इस उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री धामी मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए। उन्होंने कहा कि उत्तरायणी पर्व सिर्फ एक लोक पर्व नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड की संस्कृति का आईना है। यह हमें हमारी जड़ों से जोड़ता है और हमारी संस्कृति व लोक परंपराओं को मजबूत करता है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि लखनऊ आकर उन्हें अपने परिवार में आने जैसा महसूस हुआ। उन्होंने कहा कि लखनऊ में बसे उत्तराखंडियों ने हमारे लोक पर्व को मनाने के लिए जो छोटा सा प्रयास शुरू किया था, वह आज एक बड़ा रूप ले चुका है। उन्होंने देखा कि किस तरह उनकी बहनें पारंपरिक वेशभूषा में आई थीं और भाई भी उत्तराखंड की पारंपरिक टोपी पहने हुए थे। यह देखकर उन्हें बहुत खुशी हुई।

उन्होंने आगे कहा कि हमारी बोली और भाषा हमें हमेशा एक दूसरे से जोड़े रखती है, चाहे हम कहीं भी रहें। ऐसे सांस्कृतिक आयोजन हमारे स्थानीय कारीगरों और छोटे व्यवसायों के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। ये उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाते हैं और समाज में सम्मान भी दिलाते हैं। पीएम मोदी ने 'वोकल फॉर लोकल' का जो नारा दिया है, वह हमें अपने स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित करता है।

मुख्यमंत्री धामी ने लखनऊ के साथ अपने जुड़ाव को और विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि लखनऊ में उन्होंने न केवल पढ़ाई की, बल्कि यहीं रहकर उन्होंने समाज और देश के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को भी गहराई से समझा। लखनऊ ने उन्हें सोचने का एक नया नजरिया दिया। छात्र राजनीति के दौरान, जब वे विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता थे, तब इसी शहर ने उन्हें मुश्किलों का सामना करना और संघर्ष करना सिखाया। उन्होंने पीएम मोदी के मजबूत इरादों का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्हीं के दृढ़ संकल्प के कारण काशी में भव्य कॉरिडोर का निर्माण संभव हुआ और सदियों के इंतजार के बाद अयोध्या में रामलला विराजमान हुए।

इस अवसर पर, लखनऊ की मेयर सुषमा खर्कवाल को उनके योगदान के लिए 'उत्तराखंड गौरव सम्मान' से सम्मानित किया गया। मेयर खर्कवाल ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत को याद करते हुए कहा कि जब उन्होंने राजनीति में कदम रखा था, तब उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड एक ही राज्य थे। उन्होंने बताया कि उस समय मुख्यमंत्री धामी छात्र नेता थे और वह महिला मोर्चा की कार्यकर्ता थीं। उन्होंने मिलकर उत्तराखंड राज्य के गठन के लिए आंदोलन किया था। आज उन्हें इस बात का गर्व है कि जिस मांग को लेकर उन्होंने आंदोलन किया था, उसी आंदोलन से निकले पुष्कर सिंह धामी आज उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में प्रदेश का नेतृत्व कर रहे हैं। यह उनके लिए एक बड़े सौभाग्य की बात है।