Slow Progress Of Smart Meters In Ghaziabad Only 62 Thousand Installed In 2 Years Target Of 25 Lakh Incomplete
2 साल में लगे सिर्फ 62 हज़ार स्मार्ट मीटर, लगने हैं ढाई लाख
नवभारत टाइम्स•
गाजियाबाद में स्मार्ट मीटर लगाने का काम धीमा है। ढाई लाख मीटर लगने थे, पर दो साल में सिर्फ 62 हजार लगे हैं। इससे लोगों को गलत बिल की परेशानी हो रही है। कुछ लोग स्मार्ट मीटर का विरोध भी कर रहे हैं क्योंकि यह प्रीपेड होगा। अधिकारियों का कहना है कि इससे बिलिंग में पारदर्शिता आएगी।
गाजियाबाद में स्मार्ट मीटर लगाने का काम कछुए की चाल से चल रहा है। जनवरी 2026 तक पूरे शहर में 2.50 लाख स्मार्ट मीटर लगाने का लक्ष्य था, लेकिन दो साल बाद भी सिर्फ 62 हजार मीटर ही लग पाए हैं। इस देरी की वजह से लोगों को गलत बिजली बिल आने की परेशानी हो रही है। कई जगहों पर लोग स्मार्ट मीटर लगाने का विरोध भी कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे बिल ज्यादा आ रहा है और ये प्रीपेड होने की वजह से उन्हें पहले पैसे भरने पड़ेंगे, जो उन्हें पसंद नहीं।
अधीक्षण अभियंता अनिल कुमार सिंह ने बताया कि शहर में कुल 2.50 लाख स्मार्ट मीटर लगने हैं। अब तक केवल 62 हजार मीटर ही लगाए गए हैं। काम की धीमी गति के साथ-साथ कुछ इलाकों में लोग स्मार्ट मीटर लगाने का विरोध भी कर रहे हैं। लोगों का आरोप है कि स्मार्ट मीटर से बिजली का बिल ज्यादा आ रहा है। साथ ही, तकनीकी खराबी की वजह से भी उन्हें दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं।कुछ जगहों पर लोग इसलिए भी विरोध कर रहे हैं क्योंकि पुराने, साधारण मीटर में पहले बिल नहीं भरना पड़ता था। लेकिन स्मार्ट मीटर प्रीपेड होंगे, यानी पहले पैसे भरो फिर बिजली इस्तेमाल करो। इसी बात को लेकर लोग अपनी आपत्ति जता रहे हैं।
मुख्य अभियंता अनिल कुमार का कहना है कि स्मार्ट मीटर से बिजली के बिल में पारदर्शिता आएगी। उपभोक्ताओं को उनकी असली खपत के हिसाब से ही बिल मिलेगा। यानी जितना इस्तेमाल करोगे, उतना ही पैसा देना होगा। इससे बिजली चोरी पर भी लगाम लगेगी और सिस्टम और भी पारदर्शी बनेगा।
स्मार्ट मीटर एक ऐसी तकनीक है जो बिजली की खपत को रियल टाइम में मापती है। यह जानकारी सीधे बिजली कंपनी तक पहुंच जाती है। इससे बिल बनाने में गलती की गुंजाइश कम हो जाती है। साथ ही, यह प्रीपेड होने के कारण लोगों को अपने खर्च पर भी नियंत्रण रखने में मदद करता है।