'जैन दर्शन व्यावहारिक, उसे आचरण में उतारें'

नवभारत टाइम्स

नई दिल्ली में जैन धर्मसभा आयोजित हुई। आचार्य श्री श्रुतसागरजी ने पर्यावरण स्वच्छता पर जोर दिया। कुलपति मुरली मनोहर पाठक ने जैन दर्शन को व्यावहारिक बताते हुए आचरण में उतारने की बात कही। विभिन्न मंदिरों में धार्मिक अनुष्ठान और वार्षिकोत्सव मनाए गए। भक्तों ने भक्तिभाव से भाग लिया।

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नई दिल्ली: रविवार को कुंद-कुंद भारती में आयोजित एक विशाल धर्मसभा में, श्वेतपिच्छाचार्य श्री विद्यानंदजी मुनिराज के शिष्य आचार्य श्री श्रुतसागरजी ने पर्यावरण को स्वच्छ रखने की महत्ता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, "जब तक वायु है तब तक हमारी आयु है।" इस अवसर पर मुख्य अतिथि श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विवि. के कुलपति मुरली मनोहर पाठक ने जैन दर्शन की व्यावहारिकता को रेखांकित करते हुए कहा कि इसे केवल सिद्धांतों तक सीमित न रखकर आचरण में उतारना चाहिए। मंगलाचरण डा वीरसागर जैन ने किया। संस्था के अध्यक्ष सतीश जैन, मंत्री अनिल जैन, संघपति राजेंद्र जैन, जैन समाज दिल्ली के प्रधान चक्रेश जैन, साहू अखिलेश जैन, विवेक जैन, तानिया जैन सहित कई गणमान्य लोगों ने विनयांजलि अर्पित की।

इसी क्रम में, दि. जैन मंदिर निर्माण विहार में आयोजित श्री कल्याण मंदिर विधान के दौरान उपा. श्री गुप्तिसागरजी ने मन की पवित्रता को जीवन की उज्ज्वलता से जोड़ा। उन्होंने कहा कि यदि हम अपने मन को पवित्र रखेंगे तो हमारा जीवन उज्जवल हो जाएगा।
वहीं, श्री दि. जैन मंदिर आत्मवल्लभ विहार सोसायटी सेक्टर-13 रोहिणी ने अपना 25वां स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया। इस अवसर पर भगवान चंद्रप्रभु जी का अभिषेक और शांतिधारा के बाद पंडित संजीव जैन ने विधान कराया।

सिद्ध शक्तिपीठ बालाजी धाम, त्रिनगर में भी 32वां वार्षिकोत्सव मनाया गया। महंत प्रमोद महाराज के सान्निध्य में बालाजी महाराज के भव्य श्रृंगार के बाद बाल स्वरूप के दर्शन कराए गए।

संतोषी मां दुर्गा मंदिर ईस्ट कृष्णा नगर में भागवत कथा का आयोजन हुआ, जिसमें आचार्य कौशल किशोर मिश्र उदय -श्रावस्ती ने कथा के श्रवण से प्रेमभक्ति प्राप्त होने की बात कही। उन्होंने कहा कि कथा के भक्तिपूर्वक श्रवण प्रेमभक्ति प्राप्त होती है।