In Up Long Distances Will Now Have To Be Covered For Vehicle Fitness Government Centers Closed
फिटनेस के लिए हरदोई से लखनऊ, उत्तराखंड तक लगानी पड़ेगी दौड़
नवभारत टाइम्स•
उत्तर प्रदेश में गाड़ियों की फिटनेस के नियमों में बड़ा बदलाव हुआ है। अब केवल प्राइवेट ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन पर ही फिटनेस होगी। सरकारी फिटनेस सेंटर बंद कर दिए गए हैं। इससे लोगों को फिटनेस के लिए दूसरे जिलों की यात्रा करनी पड़ रही है। हरदोई के वाहन मालिकों को लखनऊ जाना होगा। यह व्यवस्था पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ाएगी।
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने उत्तर प्रदेश में गाड़ियों की फिटनेस प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। अब केवल प्राइवेट ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (ATS) पर ही गाड़ियों की फिटनेस जांच होगी। यूपी के 35 जिलों में चल रहे सरकारी फिटनेस सेंटरों को तुरंत बंद कर दिया गया है। इससे इन जिलों के लोगों को फिटनेस के लिए दूसरे जिलों में जाना पड़ेगा, जहां कई तरह की दिक्कतें सामने आ रही हैं। उदाहरण के लिए, उत्तराखंड के देहरादून जैसे जिलों के ATS को यूपी के मुजफ्फरनगर और सहारनपुर से जोड़ा गया है। वहीं, हरदोई को लखनऊ से संबद्ध किया गया है। हरदोई के वाहन मालिकों को अब बख्शी का तालाब, लखनऊ स्थित ATS पर फिटनेस करवानी होगी, जो काफी लंबी दूरी है।
MoRTH के आदेश के मुताबिक, अब वाहनों की फिटनेस जांच सिर्फ ATS के जरिए ही होगी। फिलहाल, उत्तर प्रदेश में 15 ATS काम कर रहे हैं, जबकि 35 जिलों में पहले मैनुअल फिटनेस होती थी। इन मैनुअल फिटनेस सेंटरों के फिटनेस प्रमाण पत्र जारी करने की प्रणाली को 1 जनवरी से रद्द कर दिया गया है। अब इन जगहों पर फीस कटना भी बंद हो गया है। जिन जिलों में ATS नहीं हैं, उन्हें आसपास के जिलों के ATS से जोड़ा गया है। फिरोजाबाद, बिजनौर, झांसी, मुरादाबाद, कानपुर देहात, वाराणसी, बरेली, फतेहपुर, रामपुर, लखनऊ, आगरा, कानपुर नगर और मीरजापुर जैसे जिलों में ATS की सुविधा उपलब्ध है। स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के अनुसार, किसी भी जिले में अधिकतम तीन ATS स्थापित किए जा सकते हैं। ATS के माध्यम से वाहन फिटनेस परीक्षण पूरी तरह से स्वचालित होता है। इसमें कैमरे लगे होते हैं और यह अल्गोरिदम पर आधारित होता है। सारी जानकारी डेटा के रूप में लॉग होती है। इससे इंसानी गलती की गुंजाइश कम हो जाती है। साथ ही, पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ती है।इस नई व्यवस्था में खामियां साफ दिख रही हैं, जिससे लगता है कि संबंधित अधिकारियों से सलाह नहीं ली गई है। सिंगरौली और बलरामपुर जिलों को एक साथ जोड़ दिया गया है। सिंगरौली से बलरामपुर की दूरी करीब 500 किलोमीटर है। ऐसे में, वाहन मालिकों को फिटनेस के लिए इतनी लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी। इससे ट्रांसपोर्टरों की उम्मीदें भी खत्म हो गई हैं। लखनऊ में बख्शी का तालाब (BKT) में ATS बनने से ट्रांसपोर्टर पहले से ही नाराज थे। उन्होंने मांग की थी कि आरटीओ के फिटनेस सेंटर को भी जारी रखा जाए। इसका प्रस्ताव भी भेजा गया था, लेकिन नए आदेश के बाद अब इसकी संभावना खत्म हो गई है। अब ऐसे में, सरकारी तंत्र के अलावा केवल प्राइवेट ATS ही शुरू हो पाएगा।
यह बदलाव गाड़ियों की फिटनेस जांच को आधुनिक और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से किया गया है। स्वचालित प्रणाली से मानवीय हस्तक्षेप कम होगा, जिससे भ्रष्टाचार की संभावना भी कम होगी। हालांकि, जिन जिलों में ATS की सुविधा नहीं है, वहां के लोगों को लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है, जिससे परेशानी बढ़ गई है। खासकर, सिंगरौली और बलरामपुर जैसे दूरदराज के जिलों के लिए यह व्यवस्था काफी बोझिल साबित हो रही है। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि अगर सरकारी फिटनेस सेंटर भी चालू रहते तो लोगों को राहत मिलती। अब उन्हें पूरी तरह से प्राइवेट ATS पर निर्भर रहना पड़ेगा। यह देखना होगा कि यह नई व्यवस्था कितनी कारगर साबित होती है और लोगों की परेशानियों को कैसे दूर किया जाता है।