3000 Fake Workers Swindled Government Benefits Rs 25 Lakh Per Person Fraud
तीन हजार फेक श्रमिकों ने हड़पा सरकारी लाभ
नवभारतटाइम्स.कॉम•
n NBT रिपोर्ट, गुड़गांव
जिले में फेक श्रमिक बनकर तीन हजार लोगों ने सरकारी योजनाओं का लाभ लिया है। इसका खुलासा प्रदेश सरकार को भेजी गई जांच रिपोर्ट में है। इसमें प्रति फर्जी श्रमिक औसतन ढाई लाख रुपये का लाभ अवैध रूप से हड़पा गया है। ऐसे लोगों पर प्रदेश सरकार की ओर से एफआईआर करने के निर्देश दिए गए हैं।बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रक्शन वर्कर्स वेलफेयर बोर्ड के तहत जिले में एक लाख श्रमिकों का पंजीकरण किया गया था। कल्याण बोर्ड के विभिन्न योजनाओं का लाभ पाने के लिए निर्माण श्रमिक को साल में कम से कम 90 दिन काम वर्क स्लिप के रूप में प्रमाण देना होता है। जांच में पाया गया कि एक लाख में 3 हजार वर्क स्लिप पूरी तरह फेक थीं। कमिटी की जांच रिपोर्ट में सरकारी रेकॉर्ड का दुरुपयोग कर ऐसे लोगों को पंजीकृत श्रमिक दिखाया गया, जो कभी मजदूरी करते ही नहीं थे। कुछ मामलों में तो पूरे के पूरे गांवों को फर्जी तरीके से इस डेटाबेस में जोड़ दिया गया था। इसमें ग्राम सचिव की ओर से 90 दिन का काम करने का प्रमाण पत्र पर मोहर लगी हुई है। इन अपात्र लोगों ने मातृत्व व पितृत्व सहायता, बच्चों की शिक्षा छात्रवृत्ति, आवास ऋण, मेडिकल सहायता और पेंशन जैसी वेलफेयर योजनाओं का लाभ उठाया। कितने लोग शामिल है, इसकी जांच मुख्यालय स्तर पर की जा रही है।
BOCW अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश सरकार की ओर से इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी संदिग्ध खातों के भुगतानों पर तुरंत रोक लगा दी गई है। साथ ही इस धोखाधड़ी में शामिल विभागीय अधिकारियों, कंप्यूटर ऑपरेटरों और बिचौलियों की पहचान कर उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज करने के आदेश जारी किए जा चुके हैं। श्रम विभाग में वर्क स्लिप का फर्जीवाड़ा रोकने के लिए एक नया वेब पोर्टल शुरू किया जाएगा। जिले में 97 हजार श्रमिकों का दोबारा से पंजीकरण किया जाएगा। प्रदेश के कई जिलों में फर्जी पंजीकरण कर वर्क स्लिप बनाई गईं, ताकि अपात्र लोगों को फायदा पहुंचाया जा सके। श्रम विभाग गुड़गांव के जॉइंट डायरेक्टर (I&H) वीएस धारीवाल का कहना है कि प्रदेश सरकार की ओर से गुड़गांव में फर्जी वर्क स्लिप की जांच के लिए उपायुक्त की अध्यक्षता में एक कमिटी बनी थी। जिसकी जांच में जिले में तीन हजार फर्जी वर्क स्लिप मिले। इसकी रिपोर्ट सरकार को भेजी गई है। ऐसे फर्जीवाड़ा रोकने के लिए पोर्टल तैयार किया जा रहा है।