अवसर का कमाल

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diego maradona the journey of a poor child becoming a football icon
30 अक्टूबर 1960 को अर्जेंटीना के ब्यूनस आयर्स के निकट एक गरीब परिवार में एक बालक का जन्म हुआ। चार बहनों के बाद जन्मे इस बच्चे के घर में आर्थिक तंगी इतनी थी कि खिलौने खरीदना भी मुश्किल था। जब वह चार वर्ष का हुआ, तो उसके चाचा ने जन्मदिन पर उसे एक फुटबॉल भेंट की। यह उसके जीवन की सबसे अनमोल पूंजी बन गई। इसके बाद वह हर समय उस फुटबॉल के साथ ही रहता। सिर, कंधों, घुटनों और पैरों पर गेंद को अद्भुत नियंत्रण से वह नचाता। 1969 में उसके मित्र गोयो ने अर्जेंटिनोस जूनियर्स क्लब के प्रशिक्षक फ्रांसिस कॉर्नेजो से उसका परिचय कराया। ट्रायल में आठ वर्षीय बालक की प्रतिभा देखकर कोच इतने चकित हुए कि उन्हें उसकी उम्र पर ही संदेह हो गया और प्रमाण-पत्र मंगवाना पड़ा। जल्द ही उसे क्लब की जूनियर टीम 'लोस सेबोलितास' में शामिल कर लिया गया। उसकी अगुआई में टीम ने लगातार 136 मैच जीतकर इतिहास रच दिया। 1976 में उसने पेशेवर फुटबॉल में पदार्पण किया और 1986 में अर्जेंटीना को विश्व कप जिताकर विश्व फुटबॉल का महानायक बन गया। वह बालक था- डिएगो माराडोना।

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