पर्ची निकलवा पूछा, गोली मारें या पैर तोड़ें

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draw a slip and ask shoot or break a leg serious allegations against sohna police human rights commission takes cognizance
n NBT रिपोर्ट, सोहना

सजा देने का पर्ची सिस्टम सामने आने पर खाकी सवालों के घेरे में है। मामला सोहना का है। यहां आर्म्स एक्ट सहित अन्य आरोपों में पकड़े गए युवक ने पुलिस पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। आरोप है कि हिरासत के दौरान आरोपी के सामने चार पर्चियां रखी गईं। एक पर मौत लिखा था, दूसरी पर्ची पर फ्रैक्चर, तीसरी पर गोली और चौथे कागज पर इनाम की राशि। पीड़ित के अनुसार, पुलिस ने उससे एक पर्ची चुनने को कहा। उसने पर्ची उठाई तो उस पर फ्रैक्चर लिखा था। इसके बाद उसकी आंखों पर पट्टी बांधकर जमीन पर लिटाया गया। बायां पैर दो ईंटों के बीच रखकर किसी भारी चीज से वार कर तोड़ दिया गया। अब मामले पर हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लिया है। आयोग ने मामले को मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के तहत सुनवाई योग्य मानते हुए हरियाणा के पुलिस महानिदेशक को जांच पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) से कम रैंक के अधिकारी से नहीं कराने और रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं।
पुलिस का दावा: भागने की नीयत से फ्लाईओवर से कूदा

आयोग ने 30 जून को सोहना के न्यायिक मैजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMFC) की ओर से पारित आदेश के आधार पर स्वत: संज्ञान लिया। कोर्ट के समक्ष पुलिस ने दावा किया था कि आरोपी सामान बरामदगी की कार्रवाई के दौरान भागने की नीयत से एक फ्लाईओवर से नीचे कूद गया। इस कारण उसके पैर में गंभीर चोट आई और उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेशी के दौरान आरोपी ने पुलिस के दावे को खारिज कर दिया। आरोप लगाया कि वह किसी फ्लाईओवर से नहीं गिरा, बल्कि पुलिसकर्मियों ने हिरासत में उसकी टांग जानबूझकर तोड़ी है। आरोपी ने अपनी जान को खतरा भी जताया। बताया जा रहा है कि आरोपों की संवेदनशीलता और गंभीरता8को देखते हुए न्यायिक मैजिस्ट्रेट ने अदालती समय समाप्त होने के बाद सिविल अस्पताल का दौरा किया। वहां उन्होंने किसी भी पुलिस अधिकारी की मौजूदगी के बिना आरोपी का बयान दर्ज किया। आरोपी ने आरोप लगाया कि 29 जून को उसे CIA सोहना परिसर के खुले स्थान पर ले जाकर प्रताड़ित किया गया।

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