‘जा रे हट नटखट, न खोल मेरा घूंघट’

नवभारत टाइम्स

लखनऊ में कश्यप, निषाद और गोंड समाज ने होली का उत्सव मनाया। इस दौरान हुड़ुका नृत्य और 'जा रे हट नटखट' गीत पर नृत्य प्रस्तुत किया गया। युवाओं को संस्कृति बचाने की बात कही गई। शिक्षा और महिला सशक्तिकरण पर भी जोर दिया गया। संस्था के प्रयासों की सराहना हुई।

kashyap nishad gond communitys holi festival people grooved to ja re hat natkhat song
लखनऊ में कश्यप, निषाद और गोंड समाज ने मिलकर होली का उत्सव मनाया। गोमती नगर के हिंदी मीडिया सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां हुईं और सामाजिक मेलजोल भी बढ़ा। युवाओं से अपनी संस्कृति बचाने की अपील की गई।

रविवार को कश्यप, निषाद और गोंड समाज के लोगों ने लखनऊ के गोमती नगर स्थित हिंदी मीडिया सभागार में होली का रंग जमाया। इस मौके पर सिर्फ होली का उल्लास ही नहीं था, बल्कि सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ-साथ समाज के लोगों ने एक-दूसरे से परिचय भी किया।
कार्यक्रम में छट्ठू धुरिया के दल ने अपने हुड़ुका नृत्य से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं, प्रविका गोंड ने "जा रे हट नटखट, न खोल मेरा घूंघट" गीत पर शानदार नृत्य पेश किया।

संस्था के सतीश कुमार कश्यप ने इस मौके पर कहा कि आज के युवाओं को अपनी संस्कृति और परंपराओं को बचाने में आगे आना होगा। यह उनकी एक बड़ी जिम्मेदारी है।

मुख्य अतिथि गुंजन शर्मा ने कश्यप, निषाद और गोंड समाज को एक साथ लाने के लिए संस्था के प्रयासों की खूब तारीफ की। उन्होंने कहा कि यह पहल बहुत अच्छी है।

छाया प्रसाद ने समाज में अच्छे बदलाव लाने के लिए शिक्षा और महिलाओं को सशक्त बनाने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इन दोनों चीजों से समाज में सकारात्मक परिवर्तन आएगा।