फागुन आयो रे, रंग बरसाने आयो रे

नवभारत टाइम्स

मोहनलालगंज के सिसेंडी कस्बे में होली के बाद पारंपरिक फाग का आयोजन हुआ। समाजसेवी ललित दीक्षित के नेतृत्व में यह कार्यक्रम हुआ। ढोलक, मंजीरा और झांझर की धुन पर ग्रामीण देर रात तक झूमते रहे। कलाकारों ने पारंपरिक गीत गाए। गीतों की धुन पर ग्रामीण भी झूमते नजर आए। पूरे कार्यक्रम में उत्साह और उल्लास का माहौल बना रहा।

फागुन आयो रे, रंग बरसाने आयो रे
मोहनलालगंज के सिसेंडी कस्बे में होली के बाद आने वाले रविवार को एक शानदार फाग उत्सव मनाया गया। समाजसेवी ललित दीक्षित के नेतृत्व में हुए इस आयोजन में ढोलक, मंजीरा और झांझर की थाप पर ग्रामीण देर रात तक थिरकते रहे। कलाकारों ने "फागुन आयो रे, रंग बरसाने आयो रे… बरसे गुलाल कन्हैया संग, ब्रज में छायो रे" जैसे पारंपरिक गीत गाकर माहौल को और भी रंगीन बना दिया। इस उत्सव में हर कोई उत्साह और खुशी से सराबोर था।

यह खास फाग कार्यक्रम सिसेंडी कस्बे में होली के त्योहार के बाद आयोजित किया गया था। इस आयोजन को सफल बनाने में समाजसेवी ललित दीक्षित ने अहम भूमिका निभाई। उन्होंने ही इस पारंपरिक फाग उत्सव का नेतृत्व किया।
कार्यक्रम की रौनक बढ़ाने के लिए ढोलक, मंजीरा और झांझर जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्रों का इस्तेमाल किया गया। इन वाद्य यंत्रों की मधुर धुन पर ग्रामीण देर रात तक नाचते-गाते रहे।

फाग के दौरान कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से समा बांध दिया। उन्होंने पारंपरिक गीत गाए, जिनमें से एक खास गीत था, "फागुन आयो रे, रंग बरसाने आयो रे… बरसे गुलाल कन्हैया संग, ब्रज में छायो रे"। इस गीत ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

गीतों की धुन पर ग्रामीण भी खुद को रोक नहीं पाए और झूमने लगे। पूरे कार्यक्रम के दौरान उत्साह और उल्लास का माहौल बना रहा, जिसने सभी को होली के बाद भी त्योहार का आनंद लेने का मौका दिया।