LU: हर साल जमा करनी होगी पीएचडी की फीस

नवभारत टाइम्स

लखनऊ विश्वविद्यालय में अब शोधार्थियों को हर साल पीएचडी की फीस जमा करनी होगी। दो से तीन साल की फीस एक साथ जमा करने की व्यवस्था समाप्त कर दी गई है। शोध प्रस्ताव के साथ फीस रसीद लगाना अनिवार्य होगा। जो शोधार्थी नियमित शुल्क जमा नहीं करेंगे, उनका शोध कार्य अवरुद्ध माना जाएगा।

lucknow university to now charge phd fees annually fee receipt to be attached with research proposal
लखनऊ विश्वविद्यालय ने रिसर्च स्कॉलरों के लिए एक बड़ा बदलाव किया है। अब उन्हें हर साल नियमित रूप से फीस जमा करनी होगी। पहले दो से तीन साल की फीस एक साथ जमा करने की सुविधा थी, जिसे खत्म कर दिया गया है। यह फैसला हाल ही में हुई शोध समिति की बैठक में लिया गया है। इसका मुख्य कारण यह है कि विश्वविद्यालय में कई ऐसे रिसर्च स्कॉलर हैं जो समय पर अपनी फीस जमा नहीं कर रहे थे। इस नए नियम के तहत, फीस रसीद को शोध प्रस्ताव के साथ लगाना अनिवार्य होगा।

यह नया नियम विश्वविद्यालय में रेगुलर और पार्ट-टाइम दोनों तरह की पीएचडी करने वाले छात्रों पर लागू होगा। पार्ट-टाइम पीएचडी करने वाले कई छात्रों को गाइडलाइन स्पष्ट न होने की वजह से फीस जमा करने में दिक्कत आ रही थी, जिसके चलते वे हर साल फीस नहीं भर पा रहे थे। अब हर विभाग में ऐसे शोधार्थियों की पहचान की जाएगी जिनकी फीस नियमित रूप से जमा नहीं हो रही है। पहले ऐसा होता था कि शोधार्थी दो-तीन साल बाद एक साथ फीस जमा करके अपना शोध प्रस्ताव जमा कर देते थे।
शोध समिति की बैठक में यह तय हुआ कि जेआरएफ (Junior Research Fellowship) और एसआरएफ (Senior Research Fellowship) में पंजीकृत सभी शोधार्थियों को हर साल शुल्क जमा करना होगा। यदि कोई शोधार्थी नियमित शुल्क जमा नहीं करता है, तो उसके शोध कार्य को रोक दिया जाएगा। हर साल रिसर्च स्कॉलरों की प्रगति रिपोर्ट भी जमा की जाती है, और अब इस रिपोर्ट के साथ फीस रसीद भी लगानी होगी।

विश्वविद्यालय ने उन प्रस्तावों को भी वापस भेजने का फैसला किया है जिनमें दो या तीन साल की फीस एक साथ जमा करने की बात कही गई थी। सभी विभागाध्यक्षों को निर्देश दिया गया है कि वे इस मामले में नियमानुसार कार्रवाई करें। इसके अलावा, विभागाध्यक्षों को यह भी सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि भविष्य में जब भी वे शोध प्रस्ताव भेजें, तो यह पक्का कर लें कि शोधार्थी ने हर साल नियमित रूप से शुल्क जमा किया है या नहीं। यह कदम विश्वविद्यालय में शोध कार्य को अधिक व्यवस्थित और समय पर पूरा करने के उद्देश्य से उठाया गया है। इससे यह भी सुनिश्चित होगा कि शोधार्थी अपने शोध कार्य के प्रति अधिक गंभीर रहें और समय पर अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करें। यह बदलाव विश्वविद्यालय की अकादमिक गुणवत्ता को बढ़ाने में भी मदद करेगा।