Ai To Make Operations Accurate And Easy Kgmu Experts
‘AI से ऑपरेशन होगा सटीक और आसान’
नवभारत टाइम्स•
एआई अब चिकित्सा में क्रांति ला रहा है। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के डॉ. तन्मय तिवारी ने बताया कि एआई से ऑपरेशन अधिक सटीक और आसान होंगे। यह तकनीक डॉक्टरों को श्वसन नली डालने में मदद करेगी। एआई कठिन एयरवे की पहचान और आपात स्थिति में त्वरित निर्णय लेने में सहायक है।
लखनऊ: किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. तन्मय तिवारी ने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) अब चिकित्सा क्षेत्र में ऑपरेशन को ज़्यादा सटीक, सुरक्षित और आसान बना रहा है। यह जानकारी उन्होंने एआईडीएए लखनऊ सिटी ब्रांच द्वारा आयोजित ‘ एयरवे मैनेजमेंट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं सिमुलेशन की भूमिका’ विषयक सीएमई एवं हैंड्स-ऑन कार्यशाला में दी। डॉ. तिवारी के अनुसार, पहले एनेस्थीसिया देते समय श्वसन नली डालने के लिए डॉक्टरों को सिर्फ अपनी आँखों पर भरोसा करना पड़ता था, लेकिन अब एआई की मदद से स्क्रीन पर मरीज की श्वसन नली की पूरी माप और बनावट दिखाई देती है। इससे डॉक्टर आसानी से यह समझ पाते हैं कि मरीज की जीभ का आकार कैसा है, उसका श्वसन मार्ग कैसा है और कहीं कोई खून बहने जैसी समस्या तो नहीं है। इस कार्यक्रम का उद्घाटन केजीएमयू की कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने किया। इस मौके पर विभागाध्यक्ष प्रो. मोनिका कोहली, डॉ. सोहन सोलंकी (टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल), डॉ. हेमलता और कई अन्य वरिष्ठ डॉक्टर भी मौजूद रहे।
डॉ. तिवारी ने आगे बताया कि एआई तकनीक मुश्किल एयरवे (श्वसन नली) का पहले से पता लगाने, रियल-टाइम में डेटा का विश्लेषण करने और आपात स्थिति में तुरंत फैसले लेने में बहुत मददगार साबित हो रही है। एआई वाले मॉनिटरिंग सिस्टम मरीज के शरीर के ज़रूरी मापदंडों का एकदम सही विश्लेषण करके आने वाली मुश्किलों का पहले ही पता लगा सकते हैं। इससे मरीजों की सुरक्षा कई गुना बढ़ जाती है।उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले चार-पांच सालों में एआई पर आधारित नई डिवाइस बहुत तेज़ी से विकसित होंगी। इसलिए मेडिकल छात्रों को अभी से इसकी ट्रेनिंग देना और उनके कोर्स में इसे शामिल करना बहुत ज़रूरी है। इसी सोच के साथ इस कार्यक्रम में एनेस्थीसिया में एआई के इस्तेमाल के बारे में विस्तार से बताया गया।
पहले एनेस्थीसिया देते समय श्वसन नली डालते समय डॉक्टरों को केवल प्रत्यक्ष दृश्य पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब एआई आधारित तकनीक से स्क्रीन पर पूरी माप और संरचना दिखाई देती है। इससे यह आकलन करना आसान हो जाता है कि मरीज की जीभ का आकार क्या है, श्वसन मार्ग कैसा है और कहीं रक्तस्राव जैसी जटिलता तो नहीं है।
एआई तकनीक कठिन एयरवे की पूर्वानुमान, रियल-टाइम डेटा विश्लेषण और आपात स्थिति में त्वरित निर्णय लेने में सहायक है। एआई युक्त मॉनिटरिंग सिस्टम मरीज के शारीरिक मानकों का सटीक विश्लेषण कर संभावित जटिलताओं की पहले से पहचान कर सकते हैं, जिससे सुरक्षा कई गुना बढ़ जाती है।
डॉ. तिवारी ने इस बात पर ज़ोर दिया कि मेडिकल छात्रों को अभी से एआई की ट्रेनिंग देना और पाठ्यक्रम में शामिल करना आवश्यक है।