शिक्षकों पर आर्थिक बोझ कम करना है मकसद

नवभारत टाइम्स

शिक्षा निदेशालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को सीबीएसई अधिकारियों के साथ बैठक कर सीपीडी ट्रेनिंग की कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य शिक्षकों पर पड़ने वाले वित्तीय भार को समाप्त करना है। यह कदम प्रशिक्षण प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाएगा। आदेशों का पालन न करने पर गंभीरता से कार्रवाई होगी।

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शिक्षा निदेशालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे सीबीएसई अधिकारियों के साथ मिलकर सीपीडी ट्रेनिंग की योजना बनाएं। इस ट्रेनिंग का मकसद शिक्षकों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करना है। निदेशालय ने साफ कहा है कि किसी भी शिक्षक को इस ट्रेनिंग के लिए पैसे नहीं देने होंगे। इस आदेश का पालन न करने पर कार्रवाई की जाएगी। यह कदम शिक्षकों को राहत देने और ट्रेनिंग को बेहतर बनाने के लिए उठाया गया है।

निदेशालय ने अपने जारी किए गए निर्देशों में यह बात स्पष्ट रूप से कही है। सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके इलाके के सभी स्कूल इस बारे में जान लें। ताकि कोई भी शिक्षक सीपीडी ट्रेनिंग के नाम पर पैसे न दे।
सीपीडी ट्रेनिंग का मतलब है 'कंटीन्यूअस प्रोफेशनल डेवलपमेंट' ट्रेनिंग। यह शिक्षकों के लिए होती है ताकि वे अपने ज्ञान और कौशल को लगातार बेहतर बना सकें। निदेशालय का यह फैसला शिक्षकों को आर्थिक तंगी से बचाने के लिए है। साथ ही, यह ट्रेनिंग प्रक्रिया को और भी पारदर्शी और व्यवस्थित बनाएगा।

निदेशालय ने इस बात पर जोर दिया है कि निर्देशों की अनदेखी को बहुत गंभीरता से लिया जाएगा। यह शिक्षा विभाग की एक महत्वपूर्ण पहल है। इसका उद्देश्य शिक्षकों पर बेवजह का आर्थिक बोझ डालना नहीं है। बल्कि, उन्हें बेहतर प्रशिक्षण देना है।